प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की शुक्रवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में मुलाकातहुई. शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी दोनों नेता बिम्सटेक सम्मेलन से इतर मिले. इसदौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद रहे दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट बातचीत हुई.पीएममोदी की मोहम्मद यूनुस से मुलाकात को लेकर भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि ‘पीएम मोदी ने एक बार फिर लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति समर्थन जताया. उन्होंने प्रोफेसर यूनुस के भारत के साथ सकारात्मक संबंधों की इच्छा को भीरेखांकित किया. प्रधानमंत्री ने अपील की कि माहौल खराब करने वाली बयानबाजी से बचा जाए. सीमा पर सख्ती से अवैध घुसपैठ को रोका जासकता है और सीमा सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है. प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिरकी.बीते साल अगस्त में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ा था. उसके बाद से मोहम्मद यूनुस ही बांग्लादेश की अंतरिमसरकार का नेतृत्व कर रहे हैं.
मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल घिरा है विवादों में
हालांकि मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल विवादों में घिरा रहा है और उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर अत्याचार कीघटनाएं बढ़ीं. इसके चलते भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी खटास आई है बीते हफ्ते ही चीन के दौरे पर मोहम्मद यूनुस ने भारत के उत्तर पूर्वीराज्यों को लेकर विवादित बयान दिया था. जिसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी आई है.दरअसल मोहम्मद यूनुस ने चीन दौरे पर चीन कीसरकार से बांग्लादेश में निवेश बढ़ाने की अपील की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत के उत्तर पूर्वी राज्य चारों तरफ जमीन से घिरे हैं और उनकेपास समुद्र तक पहुंच नहीं है. ऐसे में ये चीन के लिए अवसर हो सकता है. मोहम्मद यूनुस ने कहा कि क्षेत्र में बांग्लादेश ही ऐसी ताकत है. जिसके पाससमुद्री पहुंच है हालांकि मोहम्मद यूनुस का यह बयान भारत को नाराज कर गया और इसे लेकर आधिकारिक चैनल से भारत ने नाराजगी भी जाहिर कीहै.प्रधानमंत्री मोदी बिम्सटेक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए थाईलैंड दौरे पर हैं. पीएम मोदी म्यांमार के सैन्य शासक मिन आंग ह्लेइंग से भी मुलाकातकी और उन्हें भूकंप से राहत और बचाव कार्यों में हरसंभव मदद देने की पेशकश की.