भाजपा में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की मुर्शिदाबाद हिंसा से निपटने के तरीके को लेकर ममता बनर्जी केनेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखा हमला किया. पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को उन्होंने कहा कि तथ्य-खोजी एसआईटी की रिपोर्टसे हिंदुओं के प्रति सरकार की क्रूरता का पता चला है. हिंसा के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने उन पर टीएमसीनेताओं की कार्रवाई की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुर्शिदाबाद हिंसा पर एसआईटी की रिपोर्ट नेस्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि हिंदुओं को निशाना बनाकर हिंसा की गई थी और इसमें टीएमसी नेता शामिल थे और पुलिस का रवैया हिंसा को रोकनेके बजाय टीएमसी नेताओं की कार्रवाई की अनदेखी करने वाला प्रतीत होता है.
ममता का कट्टरपंथियों के लिए असीम लगाव
उन्होंने कहा ‘मुर्शिदाबाद से पहलगाम तक हिंदुओं को निशाना बनाकर उनके खिलाफ हिंसा का सिलसिला साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. मुर्शिदाबादहिंसा में जिस तरह से तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे ममता बनर्जी सरकार की हिंदुओं के प्रति क्रूरता और कट्टरपंथियों के प्रति असीम लगाव का पताचलता है. यह तब हुआ जब कलकत्ता उच्च न्यायालय की तरफ से गठित तथ्य-खोजी समिति ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर अपनीरिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि हिंसा के दौरान बेतबोना गांव में 113 घर बुरी तरह प्रभावित हुए. इसमें कहा गया कि अधिकांश लोगों नेमालदा में शरण ली थी. लेकिन बेतबोना गांव में पुलिस प्रशासन ने सभी को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया, ‘हमले स्थानीयपार्षद की तरफ से निर्देशित किए गए थे और कहा कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह से “निष्क्रिय और अनुपस्थित” थी. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि लोगअपनी सुरक्षा के लिए स्थायी बीएसएफ कैंप और केंद्रीय सशस्त्र बल चाहते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया।बेतबोना के ग्रामीण ने शुक्रवार को शाम चार बजे और शनिवार को शाम चार बजे फोन किया, लेकिन पुलिस ने फोन नहीं उठाया . रिपोर्ट में आगे कहागया है, ‘एक आदमी गांव में वापस आया और उसने देखा कि किन घरों पर हमला नहीं हुआ है और फिर बदमाशों ने आकर उन घरों में आग लगा दी.
बदमाशों ने काटे पानी कनेक्शन
बदमाशों ने पानी का कनेक्शन काट दिया ताकि आग को पानी से न बुझाया जा सके इसमें कहा गया है, ‘बदमाशों ने घर के सभी कपड़ों को मिट्टी केतेल से जला दिया और घर की महिला के पास तन ढकने के लिए कपड़े नहीं थे. रिपोर्ट में हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास की हत्या का जिक्रकरते हुए कहा गया है, ‘उन्होंने घर का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और उसके बेटे और उसके पति को ले गए और उनकी पीठ पर कुल्हाड़ी से वार किया. एक आदमी तब तक वहां इंतजार कर रहा था जब तक वे मर नहीं गए.