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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को दिल्ली में मणिपुर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। इस बैठक में राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने, अवैध और लूटे गए हथियारों को आत्मसमर्पण कराने और सामान्य स्थिति वापस लाने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह समीक्षा मणिपुर में राष्ट्रपतिशासन लागू होने के बाद पहली बड़ी बैठक थी।

अवैध हथियारों की वापसी पर जोर
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री ने राज्य में जारी सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने मई 2023 से पहले जैसीशांति स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। बैठक में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मणिपुर सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, सेना औरअर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।

आम जनता की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 8 मार्च 2025 से मणिपुर के सभी रास्तों पर जनता की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, जो भीसड़क अवरोध उत्पन्न करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जबरन उगाही के मामलों पर भी कठोर कार्रवाई जारी रखने का निर्देशदिया।

सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के आदेश
मणिपुर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आवाजाही के लिए चिन्हित किए गए प्रवेश स्थलों पर बाड़ लगाने का कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया। साथ ही, मणिपुर को नशामुक्त बनाने के लिए नशे के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के आदेश भी दिए गए।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन और हथियार आत्मसमर्पण अभियान
राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि
13 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। इसके साथ ही, राज्यविधानसभा का कार्यकाल निलंबित कर दिया गया, जो 2027 तक था।

हथियार आत्मसमर्पण की प्रक्रिया
राज्यपाल द्वारा 20 फरवरी को सभी अवैध और लूटे गए हथियारों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था। इस चेतावनी के बाद सात दिनों में, खासतौर पर घाटी जिलों से, 300 से अधिक हथियार आत्मसमर्पण किए गए। इनमें मैतेई कट्टरपंथी समूह अरम्बाई टेंगोल द्वारा सौंपे गए 246 आग्नेयास्त्र शामिल हैं।

हथियार लौटाने की समयसीमा बढ़ाई गई
जनता की मांग को देखते हुए राज्यपाल ने अवैध हथियार आत्मसमर्पण करने की समयसीमा बढ़ाकर 6 मार्च शाम 4 बजे तक कर दी है। मई 2023 मेंजातीय हिंसा के शुरुआती दौर में पुलिस स्टेशनों से हजारों हथियार लूट लिए गए थे।

मणिपुर में जातीय हिंसा का संदर्भ
मई 2023 में मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ काआयोजन किया गया। इसके बाद राज्य में जातीय हिंसा भड़क उठी, जिसमें अब तक 250 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। केंद्र सरकार दोनोंपक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास कर रही है, लेकिन स्थायी शांति अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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