मणिपुर के कांगपोकपी जिले में शनिवार को कुकी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गईऔर 40 से अधिक लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद कुकी समुदाय ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया है।
कैसे हुई हिंसा?
हिंसा की शुरुआत उस समय हुई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। प्रदर्शनकारी केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह के राज्य में मुक्त आवाजाही की अनुमति देने के निर्देश का विरोध कर रहे थे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने निजी वाहनोंको आग के हवाले कर दिया और इंफाल से सेनापति जिले की ओर जा रही राज्य परिवहन बस को रोकने का प्रयास किया।
कितने लोग हुए घायल?
गमगीफई, मोटबंग और कीथेलमानबी में हुई झड़पों में कम से कम 16 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।हालांकि, अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, घायलों की संख्या 23 से अधिक हो सकती है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 27 सुरक्षाकर्मी भीघायल हुए।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवरोध
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (इंफाल-दीमापुर हाईवे) को अवरुद्ध कर दिया और सरकारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए टायर जलाए।इस विरोध प्रदर्शन का एक कारण फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी (एफओसीएस) द्वारा आयोजित शांति मार्च भी था, जिसे प्रशासन ने कांगपोकपीजिले में पहुंचने से पहले ही रोक दिया था।
प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव
पुलिस का कहना है कि एफओसीएस के मार्च को रोकने का आदेश दिया गया था क्योंकि इसकी अनुमति नहीं थी। हालांकि, एफओसीएस के सदस्योंने दावा किया कि वे गृह मंत्री के निर्देश का पालन कर रहे थे, जिसमें पूरे राज्य में लोगों को स्वतंत्र रूप से यात्रा करने की अनुमति दी गई थी।
कुकी समुदाय की प्रतिक्रिया
कुकी-जो गांव के स्वयंसेवकों के एक कथित वीडियो में कहा गया कि वे इस निर्णय के खिलाफ हैं और अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं। उन्होंनेचेतावनी दी कि उनके क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही का कड़ा विरोध किया जाएगा।
कुकी-जो परिषद ने आधी रात से अपने इलाकों में अनिश्चितकालीन बंद की घोषणा की है। परिषद ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह अशांति कोरोकने के लिए इस मुद्दे का समाधान निकाले। बयान में कहा गया, “हम बफर ज़ोन में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी नहीं लेंगे।”