
प्रधानमंत्री नरेंद्र शनिवार (13 सितंबर) को मणिपुर पहुंचे यहां पीएम ने राज्य की जनता को संबोधित करते हुए दो साल से फैले तनाव और हिंसा केमुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा कि विकास के लिए शांति जरूरी है और मणिपुर आशा और शांति की भूमि है. पीएम ने अपील की कि मणिपुर कीजनता हिंसा से आगे बढ़कर शांति का साथ दे, ताकि विकास हो सके इतना ही नहीं उन्होंने विस्थापितों के लिए 500 करोड़ रुपये के पैकेज का एलानकिया साथ ही बिजली की समस्या को सुलझाने और राज्य को बेहतर तरह से जोड़ने का वादा किया. पीएम के पूरे भाषण के केंद्र में दो विषय रहे।पहला- शांति की अपील और दूसरा विकास। ऐसे में यह जानना अहम है कि जिस मणिपुर में हिंसा को शुरू हुए दो साल हो चुके हैं, वहां अब क्याहालात हैं? बीते दो साल में ऐसा क्या-क्या हुआ है कि पीएम मोदी को यहां अब भी शांति की अपील करनी पड़ रही है? तनाव के इस माहौल के बीचप्रधानमंत्री का मणिपुर दौरा क्यों और कैसे संभव हो पाया?
मणिपुर के कुल क्षेत्रफल का 10 फीसदी ही है
इसके अलावा उनकी सुरक्षा के लिए क्या-क्या इंतजाम किए गए?मणिपुर में मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के बीच तनाव का दौर2022 के अंतिम महीनों से ही शुरू हो गया था. हालांकि, यह चरम पर तब पहुंचा जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वहमैतेई समुदाय को लंबे समय से लंबित पड़ी उनकी अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग पर विचार करे. हाईकोर्ट के इस आदेश केबाद मणिपुर के दूसरे जनजातीय समुदायों खासकर कुकी समुदाय में डर बैठ गया कि उनके रहने वाले क्षेत्रों खासकर संरक्षित पहाड़ी क्षेत्रों में मैतेईसमुदाय को बसने की इजाजत मिल जाएगी.
दरअसल, राज्य में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है ये समुदाय मुख्यतः हिंदू है और इंफाल घाटी और उसके आसपास केइलाकों में बसा हुआ है. हालांकि, इतनी बड़ी आबादी जिस क्षेत्र में बसी है, वह पूरे मणिपुर के कुल क्षेत्रफल का 10 फीसदी ही है.
न्यायालय ने सरकार को नए निर्देश दिए थे
दूसरी तरफ कुकी-जो और नगा समुदाय, जो कि मुख्यतः ईसाई धर्म से हैं और राज्य में मैतेई से कम हैं, वह 90 फीसदी इलाके में फैले हैं. मौजूदाकानून के तहत मैतेई समुदाय को राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है यही वजह है कि मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करउन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी. अदालत में याचिकाकर्ता ने कहा कि 1949 में मणिपुर की रियासत के भारत संघ में विलयसे पहले मैतेई समुदाय को एक जनजाति के रूप में मान्यता थी इसके बाद ही उच्च न्यायालय ने सरकार को नए निर्देश दिए थे. हाईकोर्ट के आदेश केमहज कुछ हफ्ते के अंदर ही मणिपुर में हिंसा की चिंगारी भड़क उठी इसकी शुरुआत 3 मई 2023 को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर(एटीएसयूएम) की तरफ से किए गए ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च के साथ हुई इस मार्च के दौरान मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कोर्ट के निर्देश के खिलाफप्रदर्शन भी शुरू हो गए. देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गए और चुराचांदपुर से होते हुए पूरे राज्य में फैल गए.