कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाकुंभ पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने कहा कि वहप्रधानमंत्री की बात का समर्थन करना चाहते थे, लेकिन पीएम मोदी ने महाकुंभ भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी। राहुल ने यहभी आरोप लगाया कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को रोजगारके मुद्दे पर भी बात करनी चाहिए थी।
प्रियंका गांधी ने विपक्ष की आवाज को दबाने का लगाया आरोप
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका मिलनाचाहिए था। उन्होंने कहा, “महाकुंभ पर प्रधानमंत्री सकारात्मक बात कर रहे थे, लेकिन विपक्ष को भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अधिकार है।विपक्ष को कम से कम दो मिनट बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।”
पीएम मोदी का महाकुंभ पर संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के सफल आयोजन पर लोकसभा में वक्तव्य दिया। उन्होंने इसे भारत केइतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ करार दिया और कहा कि महाकुंभ ने दुनिया को भारत के विराट स्वरूप का दर्शन कराया। पीएम मोदी ने इसे “सबकाप्रयास” का प्रतीक बताया और आयोजन को सफल बनाने वाले सभी व्यक्तियों और संगठनों का आभार व्यक्त किया।
लोकसभा में हंगामा और स्पीकर का जवाब
प्रधानमंत्री का भाषण समाप्त होते ही विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने सवाल पूछने का अधिकार मांगा, लेकिनलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम 372 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री या कोई मंत्री वक्तव्य देते समय सवाल नहीं पूछे जासकते।
रोजगार के मुद्दे पर चुप्पी पर सवाल
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रोजगार के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में शामिल हुए युवा रोजगार कीउम्मीद कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर कोई बात नहीं की। राहुल ने इसे “न्यू इंडिया” की नई तस्वीर बताते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया कोकमजोर करने का आरोप लगाया।