नई दिल्ली, 10 मई 2025:
कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड पर आज प्रेस को संबोधित करते हुए विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) अनुमा आचार्य ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले कास्वागत किया, जिसमें शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अधिकारियों को अगली सुनवाई तक सेवा में बहाल रखने का निर्देश दिया गया है।अनुमा आचार्य न केवल कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता हैं, बल्कि भारतीय वायुसेना में 24 वर्षों की कमीशन सेवा दे चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “आज देश की सबसे भरोसेमंद संस्था, भारतीय सेना के साहस और शौर्य को हम श्रद्धापूर्वक सलाम करते हैं।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयकी सराहना करते हुए कहा कि यह महिला अधिकारियों के लिए उम्मीद की किरण है और उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुभवी महिला अधिकारी भी युवा सैनिकों को मार्गदर्शन और मानसिक संबल देने के लिए जरूरी हैं। अनुमा ने याददिलाया कि यह न्यायिक यात्रा 1992 में शुरू हुई थी, जब कांग्रेस सरकार ने पहली बार महिला अधिकारियों की भर्ती को हरी झंडी दी थी। उस समययह एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था।
उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे विंग कमांडर अनुपमा जोशी और स्क्वाड्रन लीडर रुखसाना हक ने 2007 में कोर्ट में याचिका दायर की थी, जो आगेचलकर ‘बबीता पुनिया बनाम भारत सरकार’ केस में परिणत हुई। इसी केस के जरिए महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन और पेंशन योग्य सेवामिलने का रास्ता खुला।
अनुमा आचार्य ने इस संघर्ष के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भूमिका का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने 2010 में महिला अधिकारियों केप्रतिनिधिमंडल से मिलकर समर्थन का आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि वायुसेना की महिला अधिकारियों को पहले ही परमानेंट कमीशनमिल चुका था, जबकि थल सेना और नौसेना की महिला अधिकारियों को कोर्ट के फैसलों के बाद ही यह लाभ मिला।
प्रेस वार्ता के अंत में अनुमा ने कहा, “आज के फैसले से यह उम्मीद जागी है कि आने वाले 30 वर्षों में हम एक महिला सेना अध्यक्ष भी देख सकते हैं।” उन्होंने महिला अधिकारियों की एनडीए के ज़रिए हो रही भर्ती और नीति बदलावों की भी प्रशंसा की।
उन्होंने देश की सेनाओं के प्रति गहरी आस्था और सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, “जो भी तिरंगे को अपने से ऊपर रखता है, हम उसके प्रति श्रद्धा रखतेहैँ।