राज्यकर विभाग की विशेष जांच शाखा (एसआईबी) ने गाजियाबाद, नोएडा और लखनऊ में एक साथ छापेमारी कर मिगसन ग्रुप की 15 फर्मों की41 ब्रांचों पर कार्रवाई की। यह छापेमारी ग्राहकों द्वारा दी गई शिकायतों के आधार पर की गई थी, जिसमें आरोप था कि मिगसन ग्रुप ने फ्लैट बुककराने के बाद बायर्स से लाखों रुपये छिपे हुए चार्जेज़ के रूप में वसूले थे। इन चार्जेज़ में मेंटिनेंस, पार्किंग और विद्युत मीटर पर लोड बढ़ाने के नाम परपैसा लिया गया था, जबकि इस पर जीएसटी जमा नहीं कराया गया था। इसके बाद राज्य कर विभाग ने मामले की जांच शुरू की।


जीएसटी चोरी का मामला सामने आया
छापेमारी के दौरान राज्यकर विभाग की टीम ने मिगसन ग्रुप के ऑफिस से कंप्यूटर हार्डडिस्क, लैपटॉप और अन्य जरूरी कागजात जब्त किए।अधिकारियों के अनुसार, मिगसन ग्रुप के खिलाफ जीएसटी चोरी का मामला पाया गया, जिसमें 10 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी का आरोप है।जांच टीम ने जब्त किए गए दस्तावेज़ों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है, और इसके बाद ऑडिट कार्यवाही तथा समन जारी किए जाएंगे। इस दौरानमिगसन ग्रुप को अपनी शाखाओं में 10 करोड़ रुपये जमा कराने पड़े।
बड़ी कार्रवाई की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार, एसआईबी टीम ने जिले में अन्य रियल एस्टेट कंपनियों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दावों की भी जांच शुरू कर दी है। इसमेंबिल्डरों द्वारा धोखाधड़ी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले के बाद, अन्य बिल्डरों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई कीसंभावना जताई जा रही है। इस जांच के जरिए यह भी पता चलेगा कि अन्य कंपनियों ने जीएसटी चोरी की है या नहीं।
मिगसन कियाना प्रोजेक्ट पर बकाया
गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर-14 में मिगसन ग्रुप द्वारा चलाए जा रहे कियाना प्रोजेक्ट पर आवास विकास का 50 करोड़ रुपये से अधिक का बकायाहै। आवास विकास ने नोटिस जारी करके यह चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट में बिल्डर ने अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया है। इसकेकारण फ्लैट्स की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। यदि रजिस्ट्री होती भी है, तो वह अवैध मानी जाएगी। आवास विकास ने बिल्डर को यह निर्देश दिए हैं किवह कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद ही फ्लैट्स की रजिस्ट्री करे। इस प्रोजेक्ट में कई आवंटी ऐसे हैं जिन्होंने बिना रजिस्ट्री किए फ्लैट्स मेंरहना शुरू कर दिया है, जिसके खिलाफ आवास विकास के पास शिकायतें आई हैं।
अवैध फ्लैट्स की संख्या में वृद्धि
मिगसन कियाना प्रोजेक्ट में कुल 350 से अधिक फ्लैट्स हैं और इनमें से कई फ्लैट्स बिना रजिस्ट्री के हैं। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में नीचे कीमंजिलों पर दुकानें भी बनाई गई हैं। आवास विकास द्वारा नोटिस जारी करने के बाद भी बिल्डर ने जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा नहीं किया है। आवंटीलगातार शिकायत कर रहे हैं, और उन्हें बताया गया है कि जब तक बिल्डर कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं करता, तब तक फ्लैट्स की रजिस्ट्री नहींकी जाएगी। अगर कोई रजिस्ट्री होती है, तो वह अवैध मानी जाएगी।
बिल्डरों की धोखाधड़ी पर कार्रवाई
रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) के आदेशों के बावजूद कई बिल्डर धोखाधड़ी कर रहे हैं। मिगसन ग्रुप भी इस धोखाधड़ी में शामिल है।मिगसन ग्रुप के एक प्रोजेक्ट में 2016 में फ्लैट बुक कराने वाले ग्राहकों को 9 साल बाद भी फ्लैट नहीं मिला है। मिगसन बिल्डर के खिलाफगाजियाबाद और नोएडा में कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं। यूपी रेरा के अधिकारियों का कहना है कि इन बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगीताकि खरीदारों के हितों की रक्षा की जा सके।
आठ अन्य बिल्डरों पर भी कार्रवाई की योजना
राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-1, भूपेंद्र शुक्ला ने बताया कि एसआईबी की टीम आठ अन्य बिल्डरों पर भी कार्रवाई की योजना बना रही है।इन बिल्डरों पर अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने का शक है। विभाग इन बिल्डरों द्वारा दाखिल किए गए जीएसटी आर-1 औरजीएसटी आर-3 बी के मिलान की जांच कर रहा है। इन बिल्डरों के कई प्रोजेक्ट गाजियाबाद में चल रहे हैं, जिनमें मोरटा, लोनी, इंदिरापुरम एनएच-9 और मोदीनगर शामिल हैं।
समग्र प्रभाव
यह कार्रवाई केवल मिगसन ग्रुप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी के खिलाफ एक सख्त संदेश देती है। जीएसटीचोरी और अन्य धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ते मामलों को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार आने वाले समय में रियल एस्टेटकंपनियों के खिलाफ और भी कड़ी जांच करेगी। इस प्रकार की कार्रवाई से बिल्डर्स को चेतावनी मिल रही है कि वे ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने सेपहले अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करें और कोई भी शॉर्टकट लेने से बचें।