
आज देश की कई सरकारी संस्थाएं कमजोर पड़ती जा रही हैं। उन्हीं में एक है सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड)। इसका काम है कि शेयरबाजार में गड़बड़ी न हो और आम लोगों का पैसा सुरक्षित रहे। लेकिन जेन स्ट्रीट नाम की एक अमेरिकी कंपनी ने भारत में आकर करोड़ों लोगों की गाढ़ीकमाई लूट ली-और सेबी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
क्या किया जेन स्ट्रीट ने? – यह कंपनी भारत के डायरेक्ट इक्विटी और फ्यूचर एंड ऑप्शन बाज़ार में काम कर रही थी। यह अपनी मर्जी से बाज़ार कीदिशा तय कर रही थी — यानी किस शेयर का भाव कब कितना होगा, ये वही तय कर रहे थे।
इस जानकारी का इस्तेमाल करके वह पीछे से मुनाफा कमाती थी। ऐसा करना भारत के नियमों के खिलाफ है, और इसके लिए सज़ा का प्रावधान है।
सेबी की चुप्पी क्यों?
फरवरी 2025 में सेबी ने केवल एक चेतावनी पत्र भेजा।
मई तक कंपनी काम करती रही और फिर जाकर जुलाई 2025 में रोक लगी।
तब तक कंपनी 44,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा चुकी थी।
सेबी ने केवल 4,844 करोड़ रुपये जब्त किए — यानी कुल मुनाफे का दसवां हिस्सा भी नहीं।
आम लोगों का नुकसान
54,000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान आम निवेशकों को हुआ।
17 जनवरी 2025 को कंपनी ने अकेले दिन में 735 करोड़ रुपये कमाए।
93 प्रतिशत छोटे निवेशकों का फ्यूचर बाजार में नुकसान हुआ।
राहुल गांधी और सुप्रिया श्रीनेत की चेतावनी – कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बार-बार सरकार को आगाह किया।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा – सरकार और सेबी ने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। जेन स्ट्रीट खुलेआम लूट मचा रही थी, और जनता के लाखों-करोड़ों रुपयेस्वाहा हो गए। अब जब सारा मुनाफा बाहर जा चुका है, तब सरकार कह रही है कि हमने कार्रवाई की!
सुप्रिया श्रीनेत के सवाल
जेन स्ट्रीट को भारत में घुसने की इजाजत किसने दी?
उन्हें पैसा विदेश ले जाने की अनुमति किसने दी?
सेबी को कार्रवाई करने में 4 साल क्यों लग गए?
ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग क्या कर रहे थे?
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को इस लूट की जानकारी क्यों नहीं थी?
क्या जो पैसा बाहर गया है, उसे कभी वापस लाया जाएगा?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह सिर्फ एक आर्थिक घोटाला नहीं है, यह सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। अगर आम लोगों का पैसा देश मेंसुरक्षित नहीं है, तो फिर सरकार और सेबी का होना ही व्यर्थ है।