भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट एक निजी कंपनी की सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी देने के मुद्दे पर कांग्रेस ने अपने कुछ सहयोगी दलों के साथमिलकर लोकसभा में विरोध जताया और वॅाकआउट कर दिया. कांग्रेस सदस्यों ने सदन के वेल में आकर आरोप लगाया कि सेना की आपत्ति केबावजूद नीचे कंपनी को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट ऊर्जा परियोजना लगाने की अनुमति दी गई है. कांग्रेस सदस्यों ने सदन के वेल में आकर आरोपलगाया कि सैना की आपत्ति के बावजूद निजी कंपनी को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट ऊर्जा परियोजना लगाने की अनुमति दी गई है. यह राष्ट्रीय सुरक्षाके लिए चिंता का विषय है. केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र राज्य की तमामएजेंसियों से हरी झंडी मिलने के बाद भी किसी परियोजना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाती है. कांग्रेस और द्रमुक सहित अन्य विपक्षी सांसदो ने ऊर्जामंत्री के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त मानते हुए सदन में हंगामा किया. लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अनुपूरक प्रश्नपूछते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को साथ-साथ चलना चाहिए.
नहीं हुआ सुरक्षा नियमों का पालन
लेकिन अदाणी समूह की मिश्रित और ऊर्जा परियोजना की मंजूरी में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हुआ है. उन्होंने दावा किया है कि यह परियोजनाअंतर्राष्ट्रीय सीमा के 1 किलोमीटर तक चलेगी जबकि सुरक्षा प्रोटोकाल के अनुसार बड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं कम से कम 10 किलोमीटर दूरहोनी चाहिए. इसमें प्रहलाद जोशी ने कहा कि लाइसेंस जारी करने और मंजूरी देने से पहले केंद्र सरकार और राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियो सेमंजूरी मांगी जाती है. मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस द्रमुख के सांसद वेल में आकर नालेबाजी करते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करनेलगे. मगर मंत्री ने उनकी मांगों को देखा किया तो सदन से वॅाकआउट कर गए. लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने बाहर आकर कहा किऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा में संतुलन होना चाहिए. मगर गुजरात के खावड़ा में जो बड़ी और सौर ऊर्जा परियोजना आ रही है वह राष्ट्रीय सुरक्षा केदिशा- निर्देशों के अनुरूप आईबी से कम से कम 10 किलोमीटर दूरी पर नहीं है. सरकार ने हमारे सवालों का जवाब नहीं दिया इसलिए हमने वर्कआउटकिया गोगोई ने कहा कि कांग्रेस से जानना चाहती थी कि क्या आदाणी समूह राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर है कि सेना की आशंकाओं को नजरअंदाज कियाजा रहा है.