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देश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहाकि आज जब दुनिया भर के देश अपने बच्चों को विज्ञान, गणित और तकनीकी ज्ञान में आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं, तब हमारे देश मेंबच्चों को केवल आधारभूत और पुरानी चीज़ें ही सिखाई जा रही हैं।


सिसोदिया ने कहा कि विकसित देश आज स्कूल स्तर से ही बच्चों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन आधारित ज्ञान, रोबोट निर्माण और सॉफ्टवेयर विकासजैसे आधुनिक विषयों की शिक्षा दे रहे हैं। इसके विपरीत हमारे देश में अभी तक बच्चों को फटी हुई चटाइयों पर बैठाकर पेंट और कॉपी-पेस्ट करनासिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में आज भी कई स्कूल ऐसे हैं जहां पक्की छत नहीं है, शौचालय नहीं हैं, और बिजली-पानी की सुविधा तकनहीं है। बच्चों को मिड डे मील नहीं मिल पा रहा है और शिक्षक भी कम हैं। यह हाल तब है जब देश में लाखों करोड़ रुपये का बजट पास किया जाताहै।
सिसोदिया ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा को लेकर जो नई शिक्षा नीति बनाई गई थी, उसमें कहा गया था कि सरकार देश की कुल आय का छहप्रतिशत शिक्षा पर खर्च करेगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि केंद्र सरकार दो प्रतिशत से भी कम खर्च कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिरइस देश के बच्चों का भविष्य किसके भरोसे छोड़ा गया है? जब शिक्षा की बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं होंगी तो देश कैसे आगे बढ़ेगा? उन्होंने कहा, बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही दलों की सरकारों ने शिक्षा को कभी प्राथमिकता नहीं दी। ये लोग बस इतिहास बदलने और नफरत फैलाने की राजनीतिकरते हैं।


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