नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में नौ महीने बिताने के बाद बुधवार को पृथ्वी पर वापस आगई. सुनीता विलियम्स के अलावा उनके सहयोगी बुच विल्मोर, निक हेग और अलेक्जेंडर गोरबुनोव भी उनके साथ स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन यान से वापसलौटे हैं. क्रू ड्रैगन कैप्सूल भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 3:27 बजे फ्लोरिडा के तल्हासी के तट के पास समुद्र में सुरक्षित उतरा इसी के साथउनकी वापसी का इंतजार खत्म हो गया.59 वर्षीय सुनीता विलियम्स और 62 वर्षीय बुच विल्मोर जून 2024 से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर थे. उनके बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में तकनीकी खराबी आ गई थी जिससे लगभग एक हफ्ते का उनका छोटा परीक्षण मिशन नौ महीने तक खिंचगया. अब चिकित्सा मूल्यांकन से लेकर 45 दिनों के गहन पुनर्वास कार्यक्रम तक क्रू-9 से लौटे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए है.जैसे ही विलियम्स औरउनके साथी अंतरिक्ष वापस लौटे रिकवरी टीमों ने उन्हें स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकालने में मदद की. उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिएउन्हें प्रारंभिक चिकित्सा जांच के लिए स्ट्रेचर पर ले जाया गया. यह लंबी अवधि के मिशन से लौटने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक नियमितप्रक्रिया है क्योंकि उनके शरीर में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में महत्वपूर्ण शारीरिक परिवर्तन होते हैं.
गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण मांसपेशियां हो जाती है कमजोर
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के बिना महीनों के बाद उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियां का घनत्व कम हो जाता है जिससे वापसीपर सरल गतिविधियां भी चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं. उन्हें चक्कर आना अस्थिरता और थकान का भी अनुभव होता है क्योंकि उनका शरीर को अचानकपृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होना होता है.उन्हें ‘बेबी फीट’ का अनुभव होता है क्योंकि अंतरिक्ष में घर्षण की कमी के कारण अंतरिक्ष यात्रियों केतलवों पर कॉलस नरम होने लगते हैं और छिलने लगते हैं. यह उनके पैरों को वापसी पर एक नवजात शिशु की तरह अति संवेदनशील बनाता है.उन्हेंहृदय प्रणाली में भी बड़े बदलावों का सामना करना पड़ता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के बिना शरीर में तरल पदार्थ सिर की ओर ऊपर की ओर शिफ्ट होजाते हैं. इस तरल पुनर्वितरण के परिणामस्वरूप चेहरे पर सूजन, नाक के बंद होना, सिर के अंदर दबाव बढ़ना जैसी समस्याएं होती हैं. उसी समयनिचले शरीर में तरल पदार्थ की कमी का अनुभव होता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के पैर पतले और कमजोर दिखाई देते हैं. इसे ‘पफी-हेड बर्ड-लेग्ससिंड्रोम’ कहा जाता है.
कई दिन बिताएंगे पुनर्वास कार्यक्रम में
दरअसल अपनी प्रारंभिक चिकित्सा जांच के बाद विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री ह्यूस्टन में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में कई दिन पुनर्वासकार्यक्रम में बिताएंगे, जो उन्हें पृथ्वी पर जीवन के लिए फिर से अनुकूल होने में मदद करने के लिए डि़जाइन किए गए हैं.एस्ट्रोनॉट स्ट्रेंथ, कंडीशनिंग एंडरिहैबिलिटेशन (ASCR) टीम के विशेषज्ञ उनकी रिकवरी की देखरेख करेंगे. और उनकी रीकंडीशनिंग में मदद करेंगे. पुनर्वास लैंडिंग के तुरंत बाद शुरूहो जाता है और 45 दिनों तक जारी रहता है जिसमें सप्ताह के सातों दिन प्रतिदिन दो घंटे का सत्र होता है.रिकवरी प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजितकिया गया है. पहला चरण लैंडिंग के दिन शुरू होता है यह चलने, लचीलेपन और बुनियादी मांसपेशियों को मजबूत करने पर केंद्रित होता है. दूसराचरण संतुलन अभ्यास और हृदय संबंधी कंडीशनिंग पेश करता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को समन्वय हासिल करने में मदद मिलती है. तीसरा चरणसबसे लंबा होता है जो फंक्शन डेवलपमेंट के लिए समर्पित है यह सुनिश्चित करता है कि वे बिना किसी परेशानी के दैनिक गतिविधियां कर सकें.