
मोदी सरकार ने अमेरिकी कपास पर लगने वाले 11 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी को माफ कर देश के किसानों के साथ बड़ा धोखा किया है. इससे अमेरिकीकपास की कीमत हमारे किसानों की कपास से 15-20 रुपए प्रति किलो सस्ती हो जाएगी और अब हमारे किसानों को कपास का दाम 900 रुपएप्रति मन से भी कम मिलेगा. इससे वे आत्महत्या करने को मजबूर होंगे. मोदी जी सिर्फ अडानी को बचाने और ट्रंप को खुश करने के लिए अपने देश केकिसानों की कुर्बानी दे रहे हैं. हमारी मांग है कि केंद्र सरकार अमेरिकी कपास पर वापस 11 ड्यूटी लगाए, किसानों को कपास पर 2100 रुपए प्रति20 किलो एमएसपी व खाद-बीज पर सब्सिडी दे. रविवार को भारी बारिश के चलते चोटीला में होने वाली किसानों की महापंचायत स्थगित होने केबाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अहमदाबाद में प्रेसवार्ता कर ये बातें कही.
नहीं बिकती थी कपास
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे किसानों ने जून-जुलाई के महीने में कपास की बुआई कर दी है. किसानों ने कपास लगाने के लिए बीज, खादऔर मजदूरी के लिए कर्ज लिया है अब भारत के किसानों की कपास की फसल अक्टूबर-नवंबर में तैयार होगी. हमारे किसान सोच रहे रहे हैं किअक्टूबर-नवंबर जब उनकी फसल तैयार होगी और उसे मंडी में लेकर जाएंगे और उसका अच्छा दाम मिलेगा। लेकिन किसानों को पता नहीं है कि केंद्रमें बैठी मोदी सरकार ने किस तरह किसानों के साथ धोखा किया है. अमेरिका में किसानों द्वारा उगाई गई कपास जब भारत में आती है तो उस पर अभीतक 11 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी. इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से अमेरिका की कपास भारत में आने पर हमारे किसानों द्वारा उगाई गई कपास से महंगीहोती थी. इसलिए हमारे देश के किसानों द्वारा उगाई गई कपास मंडी में आसानी से बिक जाती थी और अमेरिका से आने वाली कपास नहीं बिकतीथी.
कपास मांगनी की शुरु
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 19 अगस्त से केंद्र की मोदी सरकार ने अमेरिका से आने वाली कपास पर लगने वाले 11 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी को हटादी है। अब अमेरिका से आने वाली कपास भारत के किसानों की कपास से 15 से 20 रुपए प्रति किलो सस्ती हो जाएगी. इस तरह, अमेरिका कीकपास भारत में हमारे किसानों की कपास से ज्यादा सस्ती हो जाएगी. नतीजन, हमारे देश के किसानों की कपास नहीं बिक पाएगी. जब हमारे देश केकिसान अक्टूबर-नवंबर में अपनी कपास मंडी में लेकर जाएंगे तो उनकी कपास खरीदने वाला कोई नहीं मिलेगा भारत की सभी टेक्सटाइल कंपनियों नेपहले ही अमेरिका से बहुत बड़े स्तर पर सस्ती कपास मांगनी शुरू कर दी है.