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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आंगनबाड़ी लाभार्थियों के फेस रिकॉग्निशन (चेहरा पहचान प्रमाणीकरण) के फैसले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकारको घेरा है. कांग्रेस ने कहा कि एक ओर सरकार समावेश का भाषण देती है तो दूसरी ओर बहिष्कार का सपना देख रही है कांग्रेस ने आरोप लगाया किसरकार समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सामाजिक कल्याण के अधिकारों से वंचित करने के लिए तकनीक का उपयोग कर रही है. महिला एवं बालविकास मंत्रालय ने हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आंगनबाड़ी केंद्रों पर राशन वितरण और बच्चों कीउपस्थिति की निगरानी के लिए अनिवार्य चेहरा पहचान प्रणाली लागू करें.

नहीं महिलाओं को करना पड़ रहा नई बाधाओं का सामना
इस पर कांग्रेस ने कहा कि डिजिटल इंडिया को सक्षम बनाना चाहिए न कि शक्तिहीन बनाना चाहिए.कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश नेएक्स पर पोस्ट में आरोप लगाया कि सबसे पहले आधार को हथियार बनाकर करोड़ों श्रमिकों को मनरेगा से वंचित किया गया. एसिड अटैक सर्वाइवर्सको आधार में नामांकन के लिए अदालत में लड़ाई लड़नी पड़ी देश भर में आदिवासी अभी भी तकनीकी गड़बड़ियों के कारण राशन खो रहे हैं.उन्होंनेकहा कि अब गर्भवती महिलाओं को एक नई बाधा का सामना करना पड़ रहा है. एनएफएसए के तहत बुनियादी और कानूनी अधिकारों के लिए चेहरेकी पहचान तकनीक लाई जा रही है. पूरी दुनिया में इस बात के प्रमाण सामने आए हैं कि एफआरटी वर्ग और त्वचा के रंग के आधार पर भेदभाव करताहै.

लाभार्थियों की संख्या में आई भारी गिरावट
कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि जब आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस), राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) एप जैसीअन्य तकनीकी या तो अपवाद साबित हुई हैं या विफल हो गई हैं. तब ऐसा किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेलसंबंधी संसद की स्थायी समिति ने अपनी 365वीं रिपोर्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में एबीपीएस की शुरूआत से पात्र लाभार्थियोंकी योजना का लाभ उठाने की क्षमता प्रभावित हुई है. लाभार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आई है जो वित्त वर्ष 19-20 में 96 लाख महिलाओं सेघटकर वित्त वर्ष 23-24 में 27 लाख रह गई. जयराम रमेश ने कहा कि फिर भी मोदी सरकार एक और भेदभावपूर्ण तकनीक लेकर आई है. डिजिटलइंडिया को सक्षम बनाना चाहिए, न कि कमजोर करना चाहिए. यह केवल भाषण समावेश का व्यवहार बहिष्कार का नहीं होना चाहिए.

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