नौसेना की परियोजनाओं का उद्घाटन
कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने हिंदमहासागर पोत आईओएस सागर को भी रवाना किया। इस पोत पर नौ देशों के 44 नौसेना कर्मी सवार हैं, जो क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय को बढ़ावादेने के उद्देश्य से यात्रा पर निकले हैं।
सागर पहल के 10 साल: सहयोग की मिसाल
राजनाथ सिंह ने आईओएस सागर की यात्रा के प्रारंभ पर सभी प्रतिभागी देशों और भारतीय नौसेना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सागर(Security and Growth for All in the Region) पहल के दस साल पूरे होने के उपलक्ष्य में की जा रही है, जो भारत की हिंद महासागर क्षेत्र मेंस्थिरता और समृद्धि के लिए प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राष्ट्रीय समुद्री दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि 5 अप्रैल 1919 को भारत का पहला व्यापारी जहाज एसएस लॉयल्टी मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुआ था। इसी कोध्यान में रखते हुए हर साल 5 अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है।
हिंद महासागर: भारत के हितों से सीधा संबंध
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र केवल भारत की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि व्यापार, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।भारतीय नौसेना यह सुनिश्चित करती है कि क्षेत्र में कोई देश आर्थिक या सैन्य शक्ति के बल पर दूसरों को दबा न सके।
आपदा प्रबंधन में अग्रणी भूमिका
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय नौसेना संकट के समय सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति बनकर उभरी है। समुद्री लूटपाट या जहाजअपहरण जैसी घटनाओं में हमारी नौसेना ने त्वरित कार्रवाई की है। यही भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि हम हिंद महासागर को मुक्त, शांतिपूर्णऔर स्थिर क्षेत्र बनाए रखें।
महासागर पहल की ओर कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मॉरीशस यात्रा का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत अब सागर पहल से आगे बढ़ते हुए महासागरपहल की ओर अग्रसर है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी।
यात्रा के लिए शुभकामनाएं
अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने आईओएस सागर पर सवार सभी नौसैनिकों को सुरक्षित और सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं औरउम्मीद जताई कि यह मिशन क्षेत्रीय समन्वय और सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।