उत्तर प्रदेश में इस वक्त सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाले मेले को लेकर विवाद छिड़ा है. यह विवाद संभल से शुरू होकर अबबहराइच दरगाह में होने वाले मेले तक पहुंच गया है. इसे लेकर यूपी में सियासी हलचल भी तेज हो चुकी है दरअसल, एक पक्ष ने गाजी को सूफी संतबताते हुए मेले के आयोजन को बीते वर्षों की तरह अनुमति देने की अपील की है.वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि मसूद गाजी एक आक्रांता था औरइसलिए उसकी याद में किसी भी तरह के आयोजन की इजाजत नहीं होनी चाहिए.सैयद सालार मसूद गाजी गजनी के आक्रमणकारी महमूद गजनवीका सेनापति और उसका भांजा था.कहा जाता है कि सालार गाजी उत्तर भारत के दिल्ली, मेरठ, बुलंदशहर, बदायूं और कन्नौज के राजाओं को रौंदताऔर प्रमुख देवस्थानों को ध्वस्त करता हुआ बाराबंकी तक आ गया था. वह बहराइच पर आक्रमण कर अयोध्या पहुंचना चाहता था. पर 1034 ईसवीमें कौशल के महाराजा सुहेलदेव ने उसे और उसकी एक लाख 30 हजार की सेना को भी खत्म कर दिया बहराइच जिले में ही सैयद सालार मसूद गाजीकी दरगाह है. यहां उसकी याद में जेठ मेला का आयोजन होता है करीब एक माह तक चलने वाले मेले में जियारत करने के लिए बड़ी संख्या मेंजायरीन पहुंचते हैं. इसमें आम लोगों के साथ-साथ नामी लोग भी शिरकत करते रहे हैं. इसी सालार गाजी की याद में संभल में नेजा मेला आयोजितकिया जाता है.
संभल प्रथ्वीराज की है राजधानी
नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद हुसैन मसूदी दावा करते हैं कि वर्ष 1015 के आसपास संभल पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी. कहा जाता है कि वर्ष1030 के आसपास पृथ्वीराज चौहान के बेटे संभल के शेख पचासे मियां की बेटी से शादी करना चाहते थे. शेख पचासे मियां की बेटी शादी नहींचाहती थीं इसकी सूचना सैयद सालार मसूद गाजी को भेजी गई. वह अपनी सेना के साथ संभल आए और पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया थाइस युद्ध में सैयद सालार मसूद गाजी के साथियों ने भी जान गंवाई थी. मसूद गाजी के जिन-जिन साथियों ने इस युद्ध में जान गंवाई, उनकी मजारसंभल के आसपास बनाई गई. उन्हीं मजार के आसपास मेले आयोजित किए जाते हैं.वहीं दूसरी ओर 2024 में छपे मुरादाबाद मंडल के गजेटियर मेंनेजा मेले का जिक्र है. इसमें यह भी कहा गया है कि इस मेले की शुरुआत से जुड़े कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं. इसी में सालार गाजी और पृथ्वीराज चौहानका जिक्र करते हुए दोनों के कालखंड को भी अलग-अलग बताया गया है.इस साल प्रशासन ने मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी है पुलिस ने कहाकि जिस सालार मसूद गाजी की याद में यह आयोजन किया जाता है वह महमूद गजनवी का सेनापति था. इतिहास में इस बात का जिक्र है कि सालारमसूद ने लूटपाट और हत्याएं की थीं.
लुटेरे और हत्यारे की याद में मेला लगाने की अनुमति नहीं
लुटेरे और हत्यारे की याद में मेला लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अगर इसके बाद भी किसी ने मेला लगाने की कोशिश की तो उसके खिलाफमुकदमा दर्ज किया जाएगा. संभल ASP श्रीश चंद्र ने कहा कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर लूटा था उसका सेनापति सैयद सालार मसूद गाजीथा. मेले को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है कानून-व्यवस्था बिगड़ने का भी खतरा है लिहाजा नेजा मेला नहीं लगने दिया जाएगाऔर न ढाल लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि अज्ञानता में यह मेला लगाया जाता रहा है तो अज्ञानी हो और यदि जानबूझकर यह मेला लगाया गया हैतो देशद्रोही हो.समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सैयद सालार मसूद गाजी को सूफी संत बताया है उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर परहमले का जिक्र इतिहास में मिलता है लेकिन उस समय सैयद सालार मसूद गाजी की उम्र मात्र 11 वर्ष थी. इस हमले में सालार गाजी का जिक्र नहींहै. गाजी 12वीं शताब्दी के महान सूफी संत थे उनकी याद में याद में जगह-जगह नेजा मेले आयोजित होते हैं. उनकी बहराइच स्थित कब्र पर बड़ाआयोजन होता है. सांसद ने एक्स पर लिखा है कि उस समय इंसानियत पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सैयद सालार मसूद गाजी ने आवाज उठाई थीवह इंसानियत की खिदमत करते थे उनको याद में लगने वाला नेजा मेला रोकना अनैतिक है.