कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने हाल ही में X (पूर्व में ट्विटर) पर एक ट्वीट के जरिए भारतीय संविधान सभा के एक ऐतिहासिक दिन की याद दिलाई।उन्होंने इस दिन के महत्व को साझा करते हुए बताया कि आज से 75 साल पहले भारतीय संविधान सभा का आखिरी कार्य दिवस था, जब भारत केसंविधान की पहली प्रति पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह दस्तावेज़ दो दिन बाद 26 जनवरी 1950 को लागू होने वाला था, जिससे भारत को एकसंप्रभु गणराज्य के रूप में पहचान मिली।
संविधान सभा के ऐतिहासिक निर्णय
जयराम रमेश ने अपने ट्वीट में इस बात का भी उल्लेख किया कि 75 साल पहले इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा द्वारा भारतीय गणराज्यके पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था, जो भारतीय राजनीति केलिए एक नए युग की शुरुआत को चिह्नित करता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के चुनाव ने भारत के नए राष्ट्र की नींव मजबूत की और लोकतंत्र के स्थायित्व कोसुनिश्चित किया।
राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत की घोषणा
इस ऐतिहासिक दिन में एक और महत्वपूर्ण घटना हुई थी, जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में घोषणा की कि “जन गण मन” को भारत काराष्ट्रगान और “वंदे मातरम” को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया जाएगा। यह घोषणा भारतीय सांस्कृतिक एकता और विविधता की पहचान के रूप मेंआज भी हमारे दिलों में जीवित है। यह दिन भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता के प्रतीकों की आधिकारिक स्वीकृति का प्रतीक बन गया।
संविधान सभा के कार्य का महत्व
संविधान सभा का कार्य केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और भारत के भविष्य की दिशा तय करने केलिए एक ऐतिहासिक मंच था। इस दिन की घटनाओं ने भारत को एक ऐसी राजनीतिक और कानूनी संरचना दी, जो आज भी भारतीय समाज केप्रत्येक पहलू में प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।
नवीन भारत की ओर कदम
आज 75 साल बाद, हम उस महान दिन को याद करते हैं जब भारत ने अपने संविधान के तहत स्वतंत्र और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में कदमरखा। जयराम रमेश के ट्वीट ने यह याद दिलाया कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक प्रेरणा है, जिसने न केवल भारत को एक नया दिशा दी, बल्कि सम्पूर्ण दुनिया में लोकतंत्र की ताकत को प्रदर्शित किया।
संविधान सभा की यह ऐतिहासिक बैठक और इसके द्वारा किए गए निर्णय न केवल भारतीय संविधान की नींव रख रहे थे, बल्कि उन सिद्धांतों औरमूल्यों को भी स्थापित कर रहे थे जो आज हमारे लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं।