NEWS अब तक

सरिता साहनी

नई दिल्ली में आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र लिखकर हाल हीमें हुए घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने पूरे विपक्ष को सदन और विधानसभा परिसर से बाहर किए जाने को लोकतंत्र के लिए खतरनाकबताया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले से न केवल जनप्रतिनिधियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि जनता की आवाज भी दब जातीहै।

विधानसभा सिर्फ सरकार का मंच नहीं, लोकतंत्र का केंद्र
आतिशी ने अपने पत्र में कहा कि विधानसभा केवल सरकार का मंच नहीं होती, बल्कि यह लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां सत्ता पक्षऔर विपक्ष दोनों की बराबर भागीदारी होती है। उन्होंने समझाया कि सदन में स्वस्थ बहस, चर्चा और विचार-विमर्श के जरिए ही सही फैसले लिए जातेहैं। विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता के मुद्दों को सामने रखने की होती है। अगर विपक्ष को ही बाहर कर दियाजाएगा, तो लोकतंत्र अधूरा रह जाएगा।

पूरे विपक्ष का निष्कासन बताया अभूतपूर्व
आतिशी ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे विपक्ष को एक साथ सदन और परिसर से बाहर कर दिया गया। उन्होंनेइसे बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि देश की किसी भी विधानसभा, लोकसभा या राज्यसभा में ऐसा उदाहरण पहले कभी नहीं देखागया। उनका कहना है कि यह फैसला लोकतंत्र पर सीधा हमला है और इससे गलत परंपरा की शुरुआत हो रही है।

अध्यक्ष के रवैये पर सवाल
आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अध्यक्ष को चुना गया था, तब सभी ने उम्मीद की थी कि वे निष्पक्षरहकर सदन को सही तरीके से चलाएंगे। लेकिन अब जो घटनाएं सामने आई हैं, उनसे लगता है कि विपक्ष के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं हो रहा है।उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

सत्ता पक्ष को छूट, विपक्ष पर कार्रवाई
आतिशी ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने कई दिनों तक सदन नहीं चलने दिया, लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्तकदम नहीं उठाया गया। इसके विपरीत, जब विपक्ष ने अपने मुद्दे उठाने की कोशिश की, तो उन्हें तुरंत सदन से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कियह साफ तौर पर दोहरा रवैया है, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।

विधायकों को गेट पर रोकना बताया गलत
आतिशी ने कहा कि विपक्षी विधायकों को न केवल सदन से बाहर किया गया, बल्कि उन्हें विधानसभा के गेट पर ही रोक दिया गया। उन्हें समितियोंकी बैठकों में भी शामिल नहीं होने दिया गया, जबकि यह उनका अधिकार है। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकारों का हनन बताया और कहाकि इससे वे अपने काम नहीं कर पाए।

जनता की आवाज दबाने का आरोप
आतिशी का कहना है कि विपक्ष का सबसे बड़ा काम जनता की समस्याओं को उठाना होता है। लेकिन अगर विपक्ष को ही बोलने नहीं दिया जाएगा, तो जनता की आवाज कौन सुनेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने जनहित के मुद्दे उठाने की कोशिश की, तो उसे भी रोक दिया गया और उसेविशेषाधिकार हनन का मामला बना दिया गया।

नई और खतरनाक परंपरा की शुरुआत
आतिशी ने कहा कि पूरे विपक्ष को बाहर करना एक नई और खतरनाक परंपरा की शुरुआत है। अगर यह जारी रहा, तो भविष्य में विपक्ष की भूमिकाखत्म हो सकती है और लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक स्थिति बताया।

अधिकार तुरंत बहाल हों
आतिशी ने अपने पत्र में मांग की है कि सभी निष्कासित विपक्षी विधायकों को तुरंत सदन में वापस बुलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सदन कोनिष्पक्ष तरीके से चलाया जाए और विपक्ष को बोलने का पूरा मौका दिया जाए। साथ ही, जनहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। आतिशीका यह पत्र दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। उन्होंने साफ कहा है कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब सत्ता और विपक्षदोनों को बराबर अधिकार मिलेंगे। अब यह देखना अहम होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं और क्या विपक्ष को उसकाअधिकार वापस मिलता है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *