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सुप्रीम कोर्ट द्वारा यौन शोषण के मामले में सजा प्राप्त आसाराम को स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पैरोल पर रिहा करने के आदेश के बाद शाहजहांपुरजिले में पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं। पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी कि पीड़िता के घर के आसपास सुरक्षाबढ़ा दी गई है, जबकि पीड़िता के पिता ने कोर्ट के आदेश पर हैरानी जताई है और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।

पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर उठी चिंता
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को 31 मार्च 2025 तक पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद, शाहजहांपुर के अधिकारियोंने पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ा दी है। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) संजय कुमार सागर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे खुदपीड़िता के घर पहुंचे और उसके परिवार से बातचीत की।

उन्होंने बताया कि पीड़िता के घर पर पहले से पुलिस का गार्ड तैनात है, इसके अलावा पीड़िता के पिता को एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी भी दिया गया है।इसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं और सुरक्षा के लिए थाना और क्षेत्राधिकारी को भी निर्देश दिए गएहैं।
सुरक्षा बढ़ाने के उपायों में यह भी शामिल है कि पीड़िता के घर के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत करवाई जाएगी। इसके साथ ही पीड़िताके पिता को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे घर से बाहर जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। पुलिस प्रशासन लगातार पीड़िता के परिवार की सुरक्षा कीनिगरानी रखेगा और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करेगा।

पीड़िता के पिता की चिंता
पीड़िता के पिता ने आसाराम को पैरोल मिलने की खबर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह निर्णय बिल्कुल अप्रत्याशित लगा औरयह उनकी आँखों की नींद उड़ा गया। उन्हें अब अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है, क्योंकि आसाराम के समर्थक लगातार उनकेखिलाफ षड्यंत्र रचने में लगे हुए हैं।

पीड़िता के पिता ने इस बारे में बात करते हुए कहा, ‘‘आसाराम के जेल में रहते हुए कई गवाहों की हत्या की गई है, और अब दो अन्य गवाह भी लापताहैं। ऐसे में मेरे परिवार की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।’’ उनका यह भी कहना था कि आसाराम ने जेल से अपने समर्थकों के जरिए उन पर कई झूठेमुकदमे भी दर्ज कराए हैं।

गवाहों के लापता होने की चिंतापीड़िता के पिता ने अपने बयान में यह दावा किया कि जब आसाराम जेल में था, तो चार गवाहों को मार दिया गया था। ये गवाह थे: अमृत प्रजापति(राजकोट), अखिल गुप्ता (रसोईया), राहुल सचान (लखनऊ) और कृपाल सिंह (शाहजहांपुर)। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि दो गवाह, भोलानंद और सुरेशानंद, अब भी लापता हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। यह गवाह आसाराम के खिलाफ मामले में अहम साक्षी थे।

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि आसाराम ने जेल से अपने समर्थकों के माध्यम से चार झूठे मुकदमे उनके खिलाफ दर्ज कराए हैं। इन झूठेमुकदमों का उद्देश्य उन्हें परेशान करना और उनके खिलाफ दबाव बनाना था। इन आरोपों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है और सुरक्षा कोलेकर नई चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
आसाराम के खिलाफ न्याय की मांग
पीड़िता के पिता ने यह भी सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार संसद में नाबालिगों के साथ अत्याचार के मामलों में फांसी की सजा की मांग करती है, तो इस मामले में आसाराम के खिलाफ न्याय क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यद्यपि आसाराम को यौन शोषण के मामले में उम्रभर कीसजा दी गई थी, फिर भी कोर्ट द्वारा उसे पैरोल पर रिहा करना एक प्रकार की ‘मेहरबानी’ है, जो न्याय की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने संसद में कानून बनाया कि नाबालिगों पर अत्याचार करने वालों को फांसी दी जाए, लेकिन आसाराम के मामले मेंन्यायालय ने बार-बार उसकी सजा में ढील दी है। यह एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्यों इतने गंभीर अपराध के बाद भी उसे पैरोल पर रिहा कियागया।’’
आसाराम का अपराध और सजा
आसाराम बापू, जो पहले एक प्रभावशाली धार्मिक गुरु के रूप में जाने जाते थे, पर 2013 में शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म काआरोप लगा था। यह घटना जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम में हुई थी, और पीड़िता के पिता ने दिल्ली में मामला दर्ज कराया था। इस मामले मेंअदालत ने आसाराम को उम्रभर की सजा सुनाई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वास्थ्य कारणों के आधार पर पैरोल पर रिहा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आसाराम के स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लिया गया। कोर्ट ने 31 मार्च 2025 तक उसे पैरोल पर रिहा करने का आदेशदिया है, जिसके बाद उसकी स्थिति और स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ चल रहे मुकदमों के संदर्भ में यह भीकहा कि अगर उसके स्वास्थ्य में कोई बदलाव आता है, तो पैरोल की अवधि को फिर से समीक्षा किया जाएगा।

इस फैसले के बाद, पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाए गए हैं, और पीड़िता के परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।

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