बैंकों द्वारा एटीएम से नकद निकासी पर शुल्क एक मई से बढ़ाया जा रहा है, जिसमें प्रति लेनदेन दो रुपये की वृद्धि की गई है। इस फैसले को लेकरकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार ने बैंकों को “लूट का कलेक्शन एजेंट” बना दिया है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही हैं और बेतहाशा महंगाई तथा बैंक शुल्कों की मनमानी वसूलीभाजपा का मूल मंत्र बन चुका है।
खरगे ने कहा कि अब एटीएम से नकद निकासी महंगी हो जाएगी, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि2018 से 2024 के बीच बचत और जन धन खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने के कारण सरकार ने करीब 43,500 करोड़ रुपये की वसूली की है।इसके अलावा, उन्होंने बताया कि बैंकों द्वारा विभिन्न शुल्क भी लगाए जा रहे हैं, जैसे निष्क्रिय खाते पर सालाना 100 से 200 रुपये, बैंक स्टेटमेंट केलिए 50 से 100 रुपये, एसएमएस अलर्ट सेवा के लिए प्रति तिमाही 20 से 25 रुपये, ऋण प्रसंस्करण शुल्क 1 से 3 प्रतिशत, समय से लोन चुकानेपर भी प्री-क्लोजर चार्ज, एनईएफटी और डिमांड ड्राफ्ट पर अतिरिक्त शुल्क और केवाईसी अपडेट में हस्ताक्षर बदलने पर भी शुल्क वसूला जाता है।
उन्होंने सरकार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले इन शुल्कों से प्राप्त राजस्व का डेटा संसद में पेश किया जाता था, लेकिन अबइसे यह कहकर रोक दिया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे आंकड़े नहीं रखता। वहीं, आरबीआई ने बैंकों को एटीएम से नकदी निकासीशुल्क बढ़ाने की अनुमति दी है, जिससे अब ग्राहकों को प्रत्येक अतिरिक्त लेनदेन पर 19 रुपये चुकाने होंगे। हालांकि, बैंक अपने ग्राहकों को हर महीनेकुछ निःशुल्क लेनदेन की सुविधा देते हैं, जिसमें मेट्रो शहरों में तीन और गैर-मेट्रो शहरों में पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन शामिल हैं। कांग्रेस ने इस वृद्धि को आमजनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है।