
मेयर का वादा सिर्फ चुनावी जुमला, कर्मचारियों के साथ किया धोखा
आम आदमी पार्टी ने भाजपा शासित नगर निगम (एमसीडी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मेयर ने एमटीएस कर्मचारियों की मांगें सिर्फउपचुनाव से पहले जनता को गुमराह करने के लिए मानी हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा मेयर ने 30 नवंबर को होने वालेएमसीडी उपचुनाव में हार के डर से धरने पर बैठे कर्मचारियों के आगे घुटने टेक दिए और चुनाव से पहले झूठे वादों का झुनझुना पकड़ा दिया।
भाजपा को हार का डर, इसलिए मान ली कर्मचारियों की मांगे
अंकुश नारंग ने कहा कि 30 नवंबर को एमसीडी के 12 वार्डों में उपचुनाव होने जा रहे हैं। जनता पहले से ही भाजपा सरकार से नाराज़ है और अबकर्मचारी भी उनके खिलाफ हैं। भाजपा को डर है कि अगर कर्मचारी धरने पर बैठे दिखे, तो जनता के बीच उसकी छवि और बिगड़ जाएगी। इसी डर सेमेयर ने कर्मचारियों की सभी मांगे मान लीं उन्होंने बताया कि एमसीडी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के एमटीएस और पीएच कर्मचारियों की हड़ताल33 दिनों तक चली, और 5,200 से अधिक कर्मचारी अपनी जायज़ मांगों को लेकर सड़कों पर डटे रहे।
अगर भाजपा की नियत साफ होती, तो 33 दिन तक हड़ताल क्यों चलती?
आप नेता ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भाजपा सच में कर्मचारियों के हित में होती, तो हड़ताल 33 दिन तक नहीं चलती। भाजपा कीनियत साफ होती तो न हड़ताल होती, न दिल्ली के लोग डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से जूझते उन्होंने कहा कि भाजपा मेयर राजा इकबाल सिंहको आखिरकार अपनी ज़िद छोड़कर कर्मचारियों के आगे झुकना पड़ा। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या वह अपना वादा निभाएंगे या यह भी एक‘चुनावी जुमला’ बनकर रह जाएगा।
मेयर ने सिर्फ दिखावे के लिए की घोषणा, एक महीने में क्या बदलेगा?
अंकुश नारंग ने कहा कि महापौर ने एमटीएस कर्मचारियों को यह कहकर मनाया है कि उनकी मांगें एक महीने के भीतर पूरी कर दी जाएंगी। लेकिन यहएक चुनावी चाल है, क्योंकि 30 नवंबर को उपचुनाव हैं और मेयर नहीं चाहते कि तब तक कोई धरना-प्रदर्शन हो। मेयर जानते हैं कि जनता औरकर्मचारी दोनों नाराज़ हैं, इसलिए उन्होंने 31 अक्टूबर को मांगे पूरी करने की घोषणा कर दी। लेकिन यह सिर्फ वादों का पुलिंदा है, सच्चाई नहीं
मेयर की समिति का प्रस्ताव भी सिर्फ दिखावा है
आप नेता ने बताया कि महापौर ने हड़ताल खत्म करने के लिए जो समिति बनाई, उसने एक प्रस्ताव दिया है कि एमसीडी आयुक्त दिल्ली सरकार कोसिफारिश भेजेंगे जिसमें कहा गया है कि एमटीएस कर्मचारियों को समान वेतन के रूप में ₹27,900 मासिक देने पर हर साल ₹41 करोड़ रुपये काअतिरिक्त खर्च आएगा, जिसे दिल्ली सरकार वहन करेगी।मेयर ने कहा कि यह प्रक्रिया एक महीने में पूरी कर ली जाएगी, लेकिन यह सब चुनावी स्टंटहै। अगर भाजपा सच में कर्मचारियों के साथ होती, तो अब तक प्रस्ताव पास हो चुका होता
भाजपा सिर्फ चुनाव के वक्त याद करती है कर्मचारियों को
अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा को कर्मचारियों की याद सिर्फ चुनाव के वक्त आती है। जब जनता तक संदेश जाना होता है कि सब कुछ ठीक है, तबभाजपा को कर्मचारी याद आते हैं। लेकिन जब वेतन देने या सुविधा देने की बात आती है, तो भाजपा गायब हो जाती है उन्होंने कहा कि भाजपा कायह रवैया न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है, बल्कि दिल्ली के नागरिकों के स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था के साथ भी खिलवाड़ है।
दिल्ली डेंगू–मलेरिया से जूझती रही, भाजपा सिर्फ बयान देती रही
अंकुश नारंग ने कहा कि जब 33 दिनों तक सफाई कर्मचारी हड़ताल पर थे, तब दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले बढ़ते गए। अगरभाजपा ने वक्त रहते कर्मचारियों की मांगे मान ली होतीं, तो दिल्ली में बीमारी नहीं फैलती। लेकिन भाजपा को जनता की नहीं, सिर्फ चुनाव की चिंताहै
अगर वादा नहीं निभाया, तो हर चुनाव में विरोध झेलेगी भाजपा
अंकुश नारंग ने चेतावनी दी कि अगर भाजपा मेयर ने 31 अक्टूबर तक किए गए वादे पूरे नहीं किए, तो आने वाले हर चुनाव में उन्हें कर्मचारी सड़कों परविरोध करते दिखेंगे। भाजपा मेयर राजा इकबाल सिंह और स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा जिम्मेदार होंगी अगर कर्मचारियों के वादे पूरे नहींहुए। जनता अब धोखे में नहीं आएगी
कर्मचारियों को न्याय और सम्मान चाहिए, न झूठे वादे
आप नेता ने कहा कि एमटीएस कर्मचारियों को 27,900 रुपये का वेतन, चिकित्सा अवकाश, अर्जित अवकाश और दयालुता के आधार पर नौकरी देनेकी मांग जायज़ है। यह मांग कोई उपकार नहीं, बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है। भाजपा को यह हक तुरंत देना चाहिए