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दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री आशीष सूद की विशेष मौजूदगी
दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद 15 नवम्बर 2025 को कॉलेज ऑफ आर्ट्स के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।समारोह में शिक्षा सचिव, कॉलेज के प्रिंसिपल, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। यह अवसर केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्किरचनात्मकता और मेहनत का उत्सव बन गया।

यह Convocation नहींआपकी Creativity का जश्न है
सूद ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह केवल पारंपरिक दीक्षांत नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, जज़्बे और मेहनत का उत्सव है।उन्होंने कहा कि छात्रों ने यह सिद्ध किया है कि समर्पण और निरंतर प्रयास हमेशा सफलता की ओर ले जाता है। उनके अनुसार, यह उपलब्धि भविष्यकी रचनात्मक दुनिया में एक मज़बूत कदम है।

रचनात्मकता है सभ्यता की ऑक्सीजन
शिक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि क्रिएटिविटी सभ्यता की ऑक्सीजन है और किसी भी देश के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गए Content, Creativity और Culture के तीन स्तंभों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह Orange Economy भारत की नई शक्ति बन रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कलाकार, डिज़ाइनर और क्रिएटिव प्रोफेशनल भारत की वैश्विकपहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।

कला के पाँच आधार और रचनात्मक अभ्यास की गहराई
आशीष सूद ने कला की बुनियाद समझाते हुए बताया कि कोई भी क्रिएटिव प्रैक्टिस पाँच मुख्य तत्वों—Material, Process, Function, Aesthetic और Concept—पर आधारित होती है। उनके अनुसार, कला केवल एक कृति नहीं, बल्कि किसी भावना, परंपरा, स्मृति और शहर कीपहचान तक पहुँचने का माध्यम है। कला एक क्षण का निर्णय नहीं, बल्कि जीवन भर चलने वाली यात्रा है।

कॉलेज ऑफ आर्ट्स की ऐतिहासिक भूमिका
शिक्षा मंत्री ने 1942 में स्थापित कॉलेज ऑफ आर्ट्स की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने दशकों से भारतीय कला को दिशा देने का कार्यकिया है। बीएफए, एमएफए और पीएचडी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से यह कॉलेज केवल शिक्षा नहीं, बल्कि एक सशक्त इमैजिनेशन इकोसिस्टमतैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह संस्थान भारत की कला संस्कृति को और भी सशक्त बनाएगा।

डिजिटल दौर में कला का महत्व
तेज़ी से बदलते डिजिटल युग में, जहाँ ध्यान भटकना आसान है, कला हमें फिर से केंद्रित, संवेदनशील और गहराई से सोचने की क्षमता देती है। सूद नेकहा कि भारतीय कला लंबे समय तक वैश्विक बाज़ारों से दूर रही, लेकिन अब यह दूरी कम हो रही है और भारतीय कलाकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नईपहचान बना रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारतीय कलाकार विश्व संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

विकसित भारत 2047 और क्रिएटिव इकॉनमी की शक्ति
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि भारत जब 2047 के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, उस यात्रा में क्रिएटिव इकॉनमी देश की सबसेबड़ी ताकत बन रही है। आत्मनिर्भर भारत मिशन में कलाकारों, स्कल्प्टर्स, डिज़ाइनरों और क्रिएटिव युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंनेकहा कि रचनात्मक सोच और कल्पनाशीलता भारत को आर्थिक, सांस्कृतिक और वैश्विक स्तर पर नई दिशा देगी।

आपकी Creative Confidence ही भारत की Cultural Confidence है
आशीष सूद ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवाओं का आत्मविश्वास भारत की सांस्कृतिक शक्ति बनेगा। उनकी कल्पनाशक्ति भारत की Soft Power को मजबूत करेगी, और उनके विचार भारत की वैश्विक पहचान को नई ऊँचाई देंगे। उन्होंने छात्रों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे अपनेकौशल और रचनात्मक क्षमता के साथ भारत को आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।

रचनात्मक शिक्षा को आगे बढ़ाने का संकल्प
समारोह में मंत्री ने कॉलेज प्रिंसिपल, संकाय और पूरी टीम को उत्कृष्ट कार्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कला, संस्कृतिऔर क्रिएटिव शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी और संस्थानों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

दीक्षांत समारोह में 277 छात्रों को डिग्री प्रदान
समारोह के दौरान बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स कार्यक्रम के 227 छात्रों और मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स के 47 छात्रों को डिग्री दी गई। इसके अलावातीन विशेष बच्चों को भी उनकी उपलब्धियों के अनुसार डिग्री प्रदान की गई। इस विशेष अवसर ने सभी छात्रों के लिए एक नई शुरुआत और भविष्यकी रचनात्मक यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया।

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