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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्रीय बजट 2025-26 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर हमला बोला है। उनकाकहना है कि यह बजट बीजेपी के द्वारा करदाता मध्य वर्ग और बिहार के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश है, और बाकी भारत के लिए इसमें कोईविशेष प्रावधान नहीं है। चिदंबरम ने इस बजट के दौरान की गई घोषणाओं का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे केवल कुछ वर्गों तक सीमित पाया है।उन्होंने यह भी कहा कि बजट में गरीबों, किसानों, और अन्य वंचित वर्गों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

वित्तीय प्रदर्शन 2024-25 का अवलोकन
चिदंबरम ने 2024-25 के मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संशोधित राजस्व प्राप्तियां 41,240 करोड़ रुपये कम होगई हैं, और शुद्ध कर प्राप्तियां भी 26,439 करोड़ रुपये कम हुई हैं। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी कटौती की गई है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, और ग्रामीण विकास शामिल हैं।

उन्होंने विशेष रूप से एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए किए गए खर्च में कमी की आलोचना की। पीएम अनुसूचित जाति अभ्युदययोजना, पीएम यंग अचीवर्स स्कॉलरशिप और एससी के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के लिए बजट में भारी कटौती की गई है, जो इसवर्ग के लिए चिंताजनक है।
अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान
चिदंबरम ने सरकार द्वारा वित्तीय घाटे को 4.9% से घटाकर 4.8% करने का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी बड़ी उपलब्धिसे कम नहीं है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था पर भारी लागत चुका कर किया गया है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं को लागू करने की क्षमताअब घट रही है, जो आने वाले समय में और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।
योजनाओं को नजरअंदाज किया गया
चिदंबरम ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी ही योजनाओं पर विश्वास खो दिया है और कई महत्वपूर्ण योजनाओं को नजरअंदाज किया गयाहै। पोषण योजना, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), फसल बीमायोजना, और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना जैसे योजनाओं के लिए बजट में भारी कटौती की गई है।

रेलवे और रोजगार योजनाओं पर हमला
उन्होंने रेलवे के बजट आवंटन को लेकर भी आपत्ति जताई है, जिसमें महज 766 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जो महंगाई को कवर करने के लिएभी अपर्याप्त है। रोजगार सृजन के लिए कई योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन चिदंबरम का कहना है कि इन योजनाओं में धन का वास्तविक उपयोगनहीं हो सका और रोजगार के अवसरों का वादा केवल एक धोखा साबित हुआ है।

नए विचारों की कमी और धीमी अर्थव्यवस्था
चिदंबरम ने यह भी कहा कि वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री ने आर्थिक सुधारों के लिए नए विचारों को अपनाने की बजाय पुराने ढर्रे पर काम किया है।उनका कहना है कि सरकार के पास एमएसएमई, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है और नौकरशाही का नियंत्रण बढ़ा दियागया है। इस बजट के कारण, भारत की विकास दर 6% से 6.5% तक ही रह सकती है, जो कि 8% की आवश्यक विकास दर से काफी नीचे है।


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