
पश्चिम बंगाल में विशेष पहचान पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार विवाद खड़ा किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता गुरु प्रकाशपासवान ने इसे ममता बनर्जी की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि एक स्पष्ट, शांतिपूर्ण और संवैधानिक प्रक्रिया पर बेवजह संदेह पैदा किया जारहा है।
सर्वोच्च न्यायालय पहले ही कर चुका है SIR को संवैधानिक घोषित
गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि SIR कोई नई या संदेहास्पद प्रक्रिया नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय कई बार इसे पूरी तरह संवैधानिक, आवश्यक औरऐतिहासिक प्रक्रिया बता चुका है। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार शंका और विरोध का माहौल बना रही हैं। उनकेअनुसार, यह सीधे-सीधे संविधान की भावना के खिलाफ है और जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।
अन्य राज्यों में शांति, लेकिन बंगाल में तनाव क्यों?
गुरु प्रकाश पासवान ने बताया कि बिहार में SIR पूरी तरह शांतिपूर्वक चल रही है। लोगों में कोई तनाव नहीं है, कोई विरोध नहीं है, और सभी प्रक्रियाको सकारात्मक रूप से स्वीकार कर रहे हैं। अन्य राज्यों में भी यह प्रक्रिया सहज और सरल रूप से चल रही है। तो फिर केवल पश्चिम बंगाल में ही इतनाशोर-शराबा क्यों? उनका स्पष्ट आरोप है कि यह भ्रम फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति है।
बीएलओ और अधिकारियों को धमकी—एक गंभीर आरोप
गुरु प्रकाश पासवान ने तृणमूल कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को खुले तौर पर डराया और धमकाया जा रहा है।बीएलओ को आदेशों का पालन न करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, और उन्हें भयभीत किया जा रहा है ताकि SIR बाधित हो सके। उन्होंने कहाकि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि जब एक कर्मचारी सिर्फ अपने काम के लिए परेशान किया जाए, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहारहै।
खेला होगा की हिंसा का स्मरण और नया खतरा
गुरु प्रकाश पासवान ने याद दिलाया कि खेेला होगा के नाम पर पहले भी पश्चिम बंगाल में भयंकर हिंसा हुई थी, जिसका असर आम लोगों ने झेलाथा। उनका प्रश्न है क्या ममता बनर्जी SIR प्रक्रिया को रोकने के लिए फिर से वही माहौल तैयार करना चाहती हैं? क्या फिर से भय और तनाव कीराजनीति शुरू करने का प्रयास हो रहा है?
घुसपैठियों की भागदौड़ और तुष्टिकरण की राजनीति पर निशाना
गुरु प्रकाश पासवान ने दावा किया कि SIR की घोषणा होते ही बंगाल में घुसपैठियों में भगदड़ मच गई। उनके अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि ममताबनर्जी ने वर्षों से घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बनाकर तुष्टिकरण की राजनीति चलाई है। उन्होंने कहा कि इस बार यह राजनीति सफल नहीं होनेवाली है और सत्य सामने आने लगा है।
संविधान सर्वोपरि ममता बनर्जी नहीं
गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि कोई भी नेता संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। यदि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी SIR जैसी संवैधानिक प्रक्रिया को रोकनेकी कोशिश कर रही हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों की तरह बंगाल को भी इस प्रक्रियाको ईमानदारी से स्वीकार करना चाहिए।
बंगाल में विरोध, पीछे की वजह क्या है?
गुरु प्रकाश पासवान के अनुसार, SIR को लेकर जो घबराहट और विरोध बंगाल में दिख रहा है, वह तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति का परिणामहै। जब पूरा देश शांतिपूर्वक प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तो केवल बंगाल में ही अविश्वास और अवरोध क्यों? उनके अनुसार, यह राजनीतिकरणनीति है, जिसका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना और सत्य को दबाना है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे संविधान पर विश्वास रखें और किसी भीतरह की अफवाहों या दुष्प्रचार में न आएँ।