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सरिता साहनी
10 
दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली

दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में बढ़ी राजनीतिक बहस
दिल्ली में झुग्गीवालों के लिए शुरू की जा रही अटल कैंटीन योजना ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षदेवेन्द्र यादव ने इस योजना पर गम्भीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार गरीबों को राहत देने का दिखावा कर रही है, जबकि असलियत मेंझुग्गीवालों के लिए कुछ भी ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने इसे गरीबों को भ्रम में रखने की कोशिश बताया।

झुग्गीवालों के घर तोड़ेअब भोजन का वादा देवेन्द्र यादव का आरोप
अपने बयान में देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने कई जगहों पर झुग्गियों पर बुलडोज़र चलवाकर हजारों परिवार बेघर कर दिए। जिन लोगोंको घर से उजाड़ा गया, उन्हीं को अब 5 रुपये की थाली देने का वादा किया जा रहा है। उनके अनुसार भाजपा पहले लोगों को तकलीफ देती है, फिरछोटी योजनाओं के नाम पर खुद को गरीबों की हितैषी बताने लगती है। उन्होंने कहा कि यह नीति झुग्गीवालों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्किउनकी मजबूरियों का फायदा उठाने की कोशिश है।

30 लाख लोगों के लिए सिर्फ 100 अटल कैंटीन कितनी कारगर योजना?
दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में करीब 30 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं, जहाँ 675 जेजे क्लस्टर मौजूद हैं। लेकिन सरकार ने सिर्फ 100 अटल कैंटीनशुरू करने की घोषणा की है। हर कैंटीन पर सुबह 500 और शाम को 500 थालियां देने की बात कही गई है। यह संख्या सिर्फ 50,000 लोगों तकही पहुँच सकती है, जबकि वास्तविक जरूरत कई गुना अधिक है। देवेन्द्र यादव के अनुसार यह व्यवस्था ऐसी है, जिसमें एक बड़े समुदाय कोनज़रअंदाज़ कर सिर्फ सीमित लोगों को ही खाना मिल पाएगा। उन्होंने इसे “पिक एंड चूज़” की व्यवस्था बताया, जहाँ सरकार चुनिंदा लोगों को हीसुविधा देगी।

महंगाई और बेरोजगारी के बीच सस्ती थाली की वास्तविकता
उन्होंने कहा कि आज दिल्ली में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे झुग्गी बस्तियों में अपराध भी फैल रहा है। ऐसे माहौल में सस्तेखाने के लिए लगने वाली भीड़ और कतारें हालात को और बिगाड़ सकती हैं। सरकार ने इस पक्ष पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया कि भारी भीड़ की स्थितिमें संघर्ष और अव्यवस्था पैदा हो सकती है। गरीब परिवारों के पास रोज़मर्रा की परेशानियाँ पहले से ही बहुत हैं, ऐसे में खाना पाने के लिए लंबी लाइनेंउनकी समस्या और बढ़ा सकती हैं।

महिलाओं और गरीबों से किए गए वादों से बचने का आरोप
देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने महिलाओं को 2500 रुपये मासिक देने, गैस सिलेंडर 500 रुपये में उपलब्ध कराने और त्योहारों पर सिलेंडरदेने जैसे वादे किए थे। लेकिन इन वादों से बचने के लिए अब गरीबों के सामने 5 रुपये की अटल थाली की घोषणा रख दी गई है। उनके अनुसारसरकार वास्तविक समस्याओं को हल करने की बजाय जनता को छोटे-छोटे भ्रमों में उलझा रही है ताकि बड़े मुद्दे पीछे छिप जाएं।

शिलान्यास तो हुआपर काम शुरू नहीं तैयारी पर सवाल
भाजपा की ओर से कहा गया है कि 25 दिसंबर को दिल्ली में 100 अटल कैंटीन शुरू कर दी जाएंगी। लेकिन देवेन्द्र यादव ने बताया कि नवंबर केआखिरी सप्ताह में कई कैंटीनों का सिर्फ शिलान्यास हुआ है और अभी तक योजना का टेंडर भी पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद इतने कम समय में 100 कैंटीन तैयार करना असंभव लग रहा है। उन्होंने इसे सिर्फ कागज़ी घोषणा बताया, जिसका मकसद लोगों को प्रभावित करना है, न कि वास्तविक कामकरना।

बायोमेट्रिक टोकन सिस्टम गरीबों पर नई बाधा?
योजना के अनुसार, एक व्यक्ति एक बार से ज्यादा खाना न ले सके, इसके लिए सरकार बायोमेट्रिक टोकन प्रणाली लागू करेगी। देवेन्द्र यादव काकहना है कि रोज़ दिहाड़ी पर काम करने वाले गरीब मजदूरों के लिए यह नई मुसीबत होगी। वे पहले ही अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, अब खाने के लिए डिजिटल टोकन की प्रक्रिया उनके लिए और परेशानियाँ खड़ी करेगी।

दिल्ली के कलस्टरों की वास्तविक स्थिति और सरकार की अनदेखी
दिल्ली में 675 अधिकृत जेजे क्लस्टर, 173 अनधिकृत क्लस्टर और लगभग 80 ऐसे क्षेत्र हैं जिनका कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। इन सभीजगहों पर रहने वाले लाखों लोग अब भी जीवन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा की जिम्मेदारी है कि इन क्षेत्रों मेंरहने वाले लोगों के घर, रोजगार, सुरक्षा और शिक्षा की व्यवस्था करे, लेकिन इसके बजाय सरकार सिर्फ घोषणाओं और झूठे दावों में लगी है।

कई बड़ी घोषणाएँलेकिन काम एक भी नहीं विपक्ष का निशाना
उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों में भाजपा सरकार ने सड़क, पेयजल, एसटीपी, कूड़े के पहाड़, प्रदूषण नियंत्रण, यमुना सफाई और बस सेवाओं कोबढ़ाने जैसे कई बड़े दावे किए हैं। लेकिन इनमें से किसी पर भी काम शुरू नहीं हुआ। ऐसे में अटल कैंटीन योजना पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकिइसका भी हश्र बाकी घोषणाओं जैसा हो सकता है।

अटल कैंटीन योजना गरीबों के जीवन में कितना बदलाव लाएगी?
देवेन्द्र यादव का स्पष्ट कहना है कि यह योजना गरीबों के जीवन में वास्तविक सुधार नहीं ला पाएगी। इस योजना के जरिए लाखों झुग्गीवालों कीसमस्याओं को नजरअंदाज करके सिर्फ एक छोटी सुविधा का वादा किया जा रहा है, जो जरूरत के मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कीगरीब बस्तियों को सिर्फ सस्ती थाली नहीं, बल्कि घर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की जरूरत है। जब तक सरकार इन मूलभूत मुद्दों पर कामनहीं करेगी, तब तक अटल कैंटीन जैसी घोषणाएँ सिर्फ दिखावा ही रहेंगी।

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