
सरकार की नज़र के सामने फैल रहा नशे का जाल – लालजी देसाई का आरोप
कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक लालजी देसाई ने गुजरात सरकार पर बेहद गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों यानी 2021 से2024 के बीच गुजरात में लगभग 16,000 करोड़ रुपये के नशे की खेप पकड़ी गई। इतनी बड़ी मात्रा में नशा मिलना अपने आप में चौंकाने वाला है, लेकिन उससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी आरोपी को सज़ा नहीं मिली। देसाई का कहना है कि यह स्थिति साफ दिखाती हैकि सरकार या तो इस मामले को लेकर बेहद लापरवाह है या फिर वह इस पूरे नेटवर्क को बचाने का काम कर रही है।
सूखे राज्य में शराब की धड़ल्ले से तस्करी
गुजरात शुरुआत से ही शराबबंदी वाला राज्य रहा है, लेकिन लालजी देसाई के अनुसार शराब की तस्करी वहां खुलेआम चल रही है। राजस्थान औरमहाराष्ट्र से रोज़ाना बड़ी मात्रा में शराब गुजरात में लाई जा रही है। इस तस्करी को रोकने की बजाय, कई जगहों पर पुलिस ही तस्करों को संरक्षण देरही है। देसाई का दावा है कि पुलिस को हर सप्ताह लगभग पैंतालीस लाख रुपये का संरक्षण शुल्क दिया जाता है, जिससे साफ है कि बिना सरकारीसहयोग के इतना बड़ा नेटवर्क चल ही नहीं सकता।
टोकन प्रणाली का खुलासा रिश्वत देकर गाड़ी पूरे राज्य में सुरक्षित
देसाई ने यह भी बताया कि शराब की तस्करी के लिए गुजरात में एक संगठित टोकन प्रणाली बनाई गई है। तस्कर एक जगह रिश्वत देते हैं और बदलेमें एक टोकन दिया जाता है। यह टोकन पूरे राज्य में मान्य होता है, जिसका मतलब है कि उसके बाद पुलिस कहीं भी गाड़ी को नहीं रोकती। यहप्रणाली इस बात का प्रमाण है कि राज्यभर में तस्करी को सुरक्षा देने के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें पुलिस और तस्कर दोनों कीसाझा भूमिका है।
कुछ गाड़ियों को पकड़ना सिर्फ दिखावा
लालजी देसाई ने बताया कि तस्कर अक्सर कुछ गाड़ियों को जानबूझकर पुलिस से पकड़वा देते हैं। इससे ऐसा दिखाया जाता है कि पुलिस शराबबंदीके कानून को सख्ती से लागू कर रही है। लेकिन असलियत यह है कि अधिकांश बड़ी गाड़ियाँ बिना किसी रोक-टोक के आगे भेज दी जाती हैं। यह पूराखेल जनता को भ्रमित करने और असली तस्करी को छिपाने के लिए किया जाता है।
जिग्नेश मेवाणी का विरोध इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने सच उजागर किया
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने जनता के साथ मिलकर कई जगहों पर अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने पुलिस और तस्करोंकी मिलीभगत को सामने लाने का काम भी किया।
लेकिन इसके बाद राज्य सरकार की मिलीभगत से पुलिसकर्मियों के परिवारों को उनके खिलाफ खड़ा किया गया। इससे यह संदेश देने की कोशिशकी गई कि पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि असलियत में मेवाणी केवल तस्करी के नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रहे थे। देसाईने कहा कि राज्य के गृह मंत्री, जो उपमुख्यमंत्री भी हैं, ने पुलिस को इस नेटवर्क के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न करने का मौन समर्थन दिया।
मुँद्रा बंदरगाह से पकड़ी जा रही है सबसे अधिक नशीली सामग्री
लालजी देसाई ने मुँद्रा बंदरगाह पर भी गंभीर सवाल उठाए, जो एक निजी औद्योगिक समूह के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक नशीलीसामग्री इसी बंदरगाह से पकड़ी गई है। उन्होंने पूछा कि क्यों नशे की अधिकतर खेपें इसी बंदरगाह से आती हैं और क्यों इन खेपों के भेजने वालों केनाम सार्वजनिक नहीं किए जाते। यह स्थिति खुद ही कई संदेह पैदा करती है, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए।
कांग्रेस का बड़ा सवाल क्या सरकार तस्करों को बचा रही है?
पूरा मामला इस बात की तरफ इशारा करता है कि गुजरात में नशा और शराब का यह बड़ा व्यापार बिना सरकारी संरक्षण के संभव नहीं हो सकता।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अगर सरकार सचमुच ईमानदारी से कार्रवाई करना चाहे, तो न तो इतने बड़े स्तर पर नशा देश में प्रवेश करेगा और न हीशराब की तस्करी इतनी संगठित तरीके से चल पाएगी। राज्य सरकार पर लगे ये आरोप बेहद गंभीर हैं और यह देखना ज़रूरी होगा कि इन सवालों काजवाब देने के लिए सरकार आगे आती है या नहीं।