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NSUI ने विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्पक्षता पर उठाई चिंता

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026।

दिल्ली विश्वविद्यालय में डूसू चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग के संयुक्त अधिष्ठाता (Joint Dean, Students’ Welfare) के एबीवीपी के डूसू चुनाव पैनल के साथ खुले तौर पर नजर आने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
NSUI का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन में महत्वपूर्ण पद पर बैठे किसी अधिकारी का किसी खास छात्र संगठन के चुनावी पैनल के साथ इस तरह नजर आना विश्वविद्यालय की निष्पक्षता और प्रशासनिक तटस्थता पर सवाल खड़े करता है। NSUI ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में छात्र चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन से यह उम्मीद की जाती है कि वह सभी छात्र संगठनों और उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार करे और किसी भी संगठन के पक्ष में दिखाई न दे।

अधिकारी की भूमिका को लेकर NSUI ने जताई आपत्ति
NSUI के अनुसार, छात्र कल्याण विभाग के संयुक्त अधिष्ठाता का पद विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला पद है। इस पद पर रहते हुए अधिकारी से सभी छात्रों और सभी छात्र संगठनों के प्रति समान व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। NSUI का आरोप है कि संबंधित अधिकारी का एबीवीपी के डूसू चुनाव पैनल के साथ नजर आना छात्रों के बीच प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा कर सकता है। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी यदि किसी विशेष छात्र संगठन के साथ सार्वजनिक रूप से जुड़ा हुआ दिखाई देता है, तो इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर छात्रों के मन में संदेह पैदा हो सकता है।

NSUI ने अधिकारी को पद से हटाने की मांग की
NSUI ने संबंधित अधिकारी को दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग के संयुक्त अधिष्ठाता पद से तत्काल हटाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि अधिकारी ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक निष्पक्षता या चुनावी प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। NSUI ने कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि गंभीर उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

विनोद जाखड़ ने क्या कहा?
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। विनोद जाखड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को किसी भी राजनीतिक या छात्र संगठन के प्रचार का मंच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र चुनावों में प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष और पूरी तरह तटस्थ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाला कोई अधिकारी किसी विशेष छात्र संगठन के चुनावी पैनल के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आता है, तो इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विनोद जाखड़ ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की और कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।

डूसू चुनाव की निष्पक्षता पर जोर
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू चुनाव में हर साल बड़ी संख्या में छात्र हिस्सा लेते हैं। चुनाव में अलग-अलग छात्र संगठन अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारते हैं और छात्र अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को वोट देते हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना विश्वविद्यालय प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। NSUI का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी छात्र संगठन को प्रशासनिक स्तर पर विशेष लाभ या समर्थन मिलता हुआ दिखाई न दे। संगठन ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को समान अवसर मिलना चाहिए। किसी भी अधिकारी की ऐसी गतिविधि नहीं होनी चाहिए जिससे किसी विशेष संगठन के पक्ष में होने का संदेश जाए।

विश्वविद्यालय प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग
NSUI ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस पूरे मामले पर स्पष्टता देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच करनी चाहिए और यदि किसी तरह का नियम उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। NSUI ने यह भी कहा कि छात्रों को यह भरोसा होना चाहिए कि डूसू चुनाव में प्रशासन किसी भी संगठन के पक्ष में नहीं है और चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से कराया जा रहा है।

NSUI ने कहा—सभी संगठनों को मिलना चाहिए समान अवसर
NSUI ने कहा कि छात्र चुनाव केवल अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच मुकाबला नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर भी देते हैं। इसलिए चुनाव से जुड़े विश्वविद्यालय अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।अधिकारियों को सभी उम्मीदवारों और संगठनों से समान दूरी बनाए रखनी चाहिए और ऐसी किसी भी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे पक्षपात का संदेश जाए। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय की संस्थागत गरिमा बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

कुलपति और प्रशासन से NSUI की प्रमुख मांगें
NSUI ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन की प्रमुख मांगों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, मामले की निष्पक्ष जांच और डूसू चुनाव को स्वतंत्र एवं पारदर्शी तरीके से कराने की मांग शामिल है। NSUI ने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो विश्वविद्यालय को नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने की बात
NSUI ने कहा कि वह डूसू चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगी और किसी भी तरह की कथित अनियमितता का विरोध करेगी। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि चुनाव के दौरान सभी छात्र संगठनों को बराबर अवसर दिया जाए और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किसी भी संगठन के पक्ष में होता हुआ दिखाई न दे। NSUI ने दोहराया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में डूसू चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से कराया जाना चाहिए।

NSUI का स्पष्ट संदेश
NSUI ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी विशेष छात्र संगठन के पक्ष में खड़ा दिखाई नहीं देना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी सभी छात्रों और सभी छात्र संगठनों के लिए समान व्यवस्था उपलब्ध कराना है। संगठन ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर छात्रों के बीच किसी तरह का संदेह पैदा होता है, तो उसे दूर करना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। NSUI ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रशासन से संबंधित मामले पर जल्द कार्रवाई करने और छात्रों के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। NSUI का कहना है कि डूसू चुनाव की लोकतांत्रिक भावना को बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन का निष्पक्ष और तटस्थ रहना बेहद जरूरी है।

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