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कांग्रेस सांसद एस. ज्योतिमणि ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में कुछ नेताओं के स्वार्थ और अंदरूनी कलह के कारण पार्टी विनाश की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि टीएनसीसी की कार्यशैली राहुल गांधी की निस्वार्थ और सिद्धांतवादी राजनीति के खिलाफ है और इससे पार्टी की वैचारिक ताकत कमजोर हो रही है। उधर, टीवीके ने ज्योतिमणि के बयान पर कहा कि उन्होंने सच्चाई उजागर की है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस समिति (टीएनसीसी) उस राह पर चल रही है, जो सीधे पार्टी नेता राहुल गांधी की निस्वार्थ, सिद्धांतवादी और बेखौफ राजनीति के विपरीत है। ज्योतिमणि ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, हम उनके (राहुल गांधी) कठिन परिश्रम और अद्वितीय योगदान को धोखा नहीं दे सकते। हालांकि उन्होंने राज्य के किसी कांग्रेस नेता का नाम नहीं लिया।

इस पर कोई टिप्पणी नहीं की
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के सेल्वापेरुनथगई ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, उनके करीबियों ने कहा कि ये आरोप सही नहीं हैं। ज्योतिमणि ने आरोप लगाया, कोई भी राजनीतिक दल यह सोच भी नहीं सकता कि चुनाव नजदीक आते ही उसके सांसद मतदान केंद्र एजेंटों की सूची जमा करने में बाधा डालें। हालांकि, कांग्रेस पार्टी में यह हो रहा है। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव इस साल मार्च-अप्रैल में होना है। ज्योतिमणि ने कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस हर दिन खबरों में रहती है, लेकिन लोगों की समस्याओं के लिए नहीं बल्कि ‘गलत कारणों’ की वजह से। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों और वैचारिक सिद्धांतों को कमजोर करने की कोशिशें चिंताजनक हैं।

पहले कभी नहीं देखे गए
ज्योतिमणि ने कहा कि तमिलनाडु अब पहले कभी नहीं देखे गए भारी खतरे का सामना कर रहा है, जो सांप्रदायिक, विभाजनकारी और हिंसक ताकतों से पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक ‘भीड़’ किसी तरह सत्ता पर कब्जा करने का इंतजार कर रही है और सामाजिक न्याय, आत्म-सम्मान, जन-केंद्रित कल्याणकारी राजनीति और विकास जैसे आदर्शों को दबा रही है। ऐसे आदर्शों को के कामराज और ‘पेरियार’ ईवी रामासामी नेताओं जैसे नेताओं ने पोषित किया। ऐसे माहौल में सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि आने वाले चुनाव को बड़ी सावधानी से संभालें। हालांकि, ज्योतिमणि ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस पार्टी ने इस भारी जिम्मेदारी को सही मायने में समझा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को तमिलनाडु के लोगों को नहीं छोड़ना चाहिए, जो सामाजिक न्याय, आत्म-सम्मान और राज्य के अधिकारों के लिए दृढ़ हैं और सांप्रदायिक और विभाजनकारी योजनाओं के आगे नहीं झुकते

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