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तमिलनाडु में सियासी हलचल के बीच डीएमके ने मंगलवार को बड़ा दावा किया। पार्टी ने कहा कि डाक वोटों में कथित गड़बड़ी के मामले को देखते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने टीवीके के एक विधायक को विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट में वोट डालने से रोक दिया है। पार्टी के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने पीटीआई वीडियो को बताया कि अगर विवादित वोट डीएमके के पक्ष में गिना जाता है, तो मतगणना बराबर हो जाएगी, जिसके बाद चुनाव का फैसला करने के लिए सिक्का उछालना पड़ेगा। टीवीके के सीनिवासा सेतुपति आर को चुनाव में 83,373 वोट मिले, जबकि डीएमके के केआर पेरियाकरुप्पन को भी 83,374 वोट मिले। सेतुपति को सिर्फ एक वोट के अंतर से विजेता घोषित किया गया।

यह कायम रखता
अन्नादुराई ने आगे कहा कि अदालत ने विधायक को निर्देश दिया है कि जब तक याचिका पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक वे मतदान से परहेज करें। उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों को लेकर भाजपा के हमलों का जवाब देते हुए अन्नादुराई ने डीएमके की वैचारिक स्थिति को स्पष्ट किया। प्रवक्ता ने कहा, ‘तमिलनाडु में, सनातन धर्म को उस जातिगत पदानुक्रम के बराबर माना जाता है जिसे यह कायम रखता है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जातिगत उत्पीड़न और हिंदू धर्म के भीतर मौजूद कठोर संरचनाओं के खिलाफ लड़ना डीएमके का डीएनए है। प्रवक्ता ने पेपर लीक की खबरों के बाद नीट परीक्षा को रद्द करने की डीएमके की मांग को भी दोहराया। उन्होंने संकट से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके की आलोचना करते हुए इसे तुगलक दरबार करार दिया।

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