वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण आयकर संशोधन किए गए हैं. एक अप्रैल से नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद करदाताओं कोदिमागी कसरत से राहत मिलेगी और टैक्स प्लानिंग भी पहले से आसान हो जाएगी.संसद की एक समिति ने कहा कि किसी मंत्रालय में अधिकारियों केलंबे समय तक पद पर बने रहने से भ्रष्टाचार बढ़ता है. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अधिकारी किसी भी मंत्रालय में निर्धारित समय सीमा सेअधिक समय तक तैनात न रहें. इसके लिए तुरंत कदम उठाया जाना चाहिए.समिति ने कहा कि पहले से तय नीति के अनुसार सभी तबादले किए जानेचाहिए. किसी भी अधिकारी को किसी भी मंत्रालय में निर्धारित समय सीमा से अधिक नहीं रखना चाहिए. कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्यायविभागों से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) से संबंधित अनुदान मांगों (2025-26) पर 27 मार्च कोसंसद में पेश 145वीं रिपोर्ट में कहा कि अधिकारियों के तबादले की एक रोटेशनल नीति है.
केंद्रीय का मुख्य आधार
लेकिन इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा.समिति ने यह टिप्पणी केंद्रीय सचिवालय सेवाओं (सीएसएस) और केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिकसेवाओं (सीएसएसएस) के कामकाज की समीक्षा के बाद की है. यह दोनों सेवाएं केंद्रीय सचिवालय के कामकाज का मुख्य आधार हैं.रिपोर्ट में कहागया है कई अधिकारी विशेष रूप से आर्थिक और संवेदनशील मंत्रालयों में 8-9 वर्षों से अधिक समय से तैनात हैं. संगठनों के प्रमुखों को चार-पांचबार बदले जाने के बावजूद ये अपने पद पर जमे हुए हैं. इसका आकलन किया जाना चाहिए ऐसे उदाहरण हैं. जहां अधिकारियों ने अपनी पोस्टिंग इसतरह से करवाई कि उनका पूरा कॅरिअर एक ही मंत्रालय में बना रहा.समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा हमारे संज्ञान में लाया गया है कि विशेष रूप सेसीएसएस और सीएसएसएस में सभी राजपत्रित अधिकारियों का संवेदनशील और गैर-संवेदनशील पोस्टिंग के आधार पर रोटेशन किया जाता है. संवेदनशील स्थानों पर तैनात अधिकारियों को 3 साल के कार्यकाल के बाद बदल दिया जाता है. इसी तरह मंत्रालयों को भी आर्थिक और गैर-आर्थिकके रूप में बांटा गया है.