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एक दशक में दिल्ली की हवा में बड़ा सुधार

नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026

दिल्ली की वायु गुणवत्ता को लेकर राजधानी के लोगों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। दिल्ली में इस साल 1 जनवरी से 15 सितंबर तक कुल 179 दिन साफ हवा वाले दर्ज किए गए हैं। यह पिछले कई वर्षों की तुलना में एक बड़ा सुधार है। साल 2016 में इसी अवधि के दौरान दिल्ली में केवल 94 दिन साफ हवा वाले दर्ज किए गए थे। करीब एक दशक में साफ हवा वाले दिनों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2016 में जहां यह संख्या 94 दिन थी, वहीं 2026 में अब तक यह आंकड़ा बढ़कर 179 दिन हो गया है। यानी 2016 की तुलना में इस साल अब तक 85 दिन अधिक साफ हवा दर्ज की गई है। दिल्ली सरकार ने इस सुधार को वायु प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों का परिणाम बताया है। सरकार का कहना है कि धूल, कूड़े, निर्माण कार्य और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।

पिछले साल के मुकाबले भी बेहतर रही दिल्ली की हवा
दिल्ली में इस साल साफ हवा वाले दिनों की संख्या पिछले साल की तुलना में भी बढ़ी है। साल 2025 में 1 जनवरी से 15 सितंबर के बीच दिल्ली में 172 साफ हवा वाले दिन दर्ज किए गए थे। वहीं इस साल इसी अवधि में यह संख्या 179 दिन हो गई है। इस तरह पिछले साल के मुकाबले भी दिल्ली में साफ हवा वाले दिनों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि यह सुधार इस बात का संकेत है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे उपायों का असर दिखाई दे रहा है।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने जताई खुशी
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने साफ हवा वाले दिनों की बढ़ती संख्या पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की हवा में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि साल 2016 में दिल्ली में केवल 94 साफ हवा वाले दिन थे, जबकि 2026 में अब तक 179 दिन साफ हवा वाले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने इसे दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में भी इन प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य दिल्ली के लोगों को ज्यादा साफ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है।

15 सितंबर को दिल्ली का AQI 98 दर्ज हुआ
15 सितंबर 2026 को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 98 दर्ज किया गया। इसे संतोषजनक श्रेणी में रखा गया।
AQI के जरिए यह पता लगाया जाता है कि किसी शहर की हवा कितनी साफ या प्रदूषित है। दिल्ली में 15 सितंबर को AQI 98 रहना राजधानी की हवा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि वायु गुणवत्ता में सुधार के पीछे कई स्तरों पर किए जा रहे प्रयासों की भूमिका है। इनमें सड़क की धूल को कम करना, कूड़ा हटाना, निर्माण कचरे का प्रबंधन और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।

सड़कों की सफाई के लिए मशीनों का इस्तेमाल
दिल्ली में सड़क की धूल वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण कारण है। धूल को कम करने के लिए सरकार की ओर से मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर्स यानी मशीनों से सड़कों की सफाई कराई जा रही है। दिल्ली सरकार के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 81 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर्स ने लगभग 2,279 किलोमीटर सड़कों की सफाई की। इस दौरान करीब 170 मीट्रिक टन सड़क की धूल इकट्ठा की गई। सरकार का कहना है कि सड़क से निकलने वाली धूल को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि सफाई के बाद इकट्ठा हुई धूल दोबारा वातावरण में न पहुंचे और प्रदूषण बढ़ाने का कारण न बने।

दिल्ली से बड़ी मात्रा में कूड़ा हटाया गया
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली में कूड़े के सही प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों से नियमित रूप से कूड़ा हटाने का काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दिल्ली से करीब 12,715 मीट्रिक टन कूड़ा हटाया गया। कूड़े के उचित प्रबंधन से शहर को साफ रखने के साथ-साथ खुले में कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों को रोकने में भी मदद मिलती है। दिल्ली सरकार का कहना है कि कूड़ा प्रबंधन को बेहतर बनाना राजधानी में प्रदूषण कम करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई
दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं भी है। इसी वजह से प्रदूषण फैलाने वाले और नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पिछले 24 घंटों में वाहनों से जुड़े प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के मामलों में 4,976 चालान जारी किए गए। सरकार का कहना है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जांच और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। इसके साथ ही लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे अपने वाहनों की नियमित जांच कराएं और प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करें।

निर्माण और तोड़फोड़ के कचरे को हटाने पर जोर
दिल्ली में लगातार निर्माण कार्य होते रहते हैं। निर्माण और पुरानी इमारतों को तोड़ने के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। इसे C&D यानी Construction and Demolition Waste कहा जाता है। अगर यह कचरा खुले में पड़ा रहे तो इससे धूल उड़ सकती है और आसपास का वातावरण प्रदूषित हो सकता है। इसलिए सरकार की ओर से इस तरह के कचरे को हटाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले 24 घंटों में करीब 2,113 मीट्रिक टन C&D कचरा हटाया गया। सरकार का कहना है कि निर्माण और तोड़फोड़ के कचरे का सही प्रबंधन दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।

भलस्वा, गाजीपुर और ओखला में पुराने कचरे की बायोमाइनिंग
दिल्ली के पुराने कूड़ा स्थलों पर जमा कचरे को हटाने के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है। भलस्वा, गाजीपुर और ओखला के कूड़ा स्थलों पर पुराने कचरे की बायोमाइनिंग की जा रही है। बायोमाइनिंग के जरिए लंबे समय से जमा पुराने कचरे को अलग करके उसे वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाता है। इससे कूड़े के बड़े ढेर को कम करने और जमीन को दोबारा उपयोग में लाने में मदद मिलती है। दिल्ली सरकार के अनुसार, पिछले 24 घंटों में इन तीनों कूड़ा स्थलों पर करीब 19,212 मीट्रिक टन पुराने कचरे को बायोमाइनिंग के जरिए प्रोसेस किया गया।

प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम
दिल्ली सरकार का कहना है कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किसी एक क्षेत्र पर काम करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करनी जरूरी है। इसी वजह से दिल्ली में सड़क की धूल कम करने, कूड़ा हटाने, निर्माण कचरे का प्रबंधन करने, पुराने कूड़े की बायोमाइनिंग करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर कार्रवाई करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन सभी प्रयासों को लगातार जारी रखने से आने वाले समय में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में और सुधार किया जा सकता है।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, प्रयास आगे भी जारी रहेंगे
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली की हवा में सुधार एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन सरकार अभी अपने प्रयासों को रोकने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करना दिल्ली सरकार की लंबे समय की प्राथमिकता है। उन्होंने साफ किया कि सरकार आने वाले समय में भी धूल नियंत्रण, कूड़ा प्रबंधन, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई और अन्य जरूरी कदमों को जारी रखेगी। मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, दिल्ली को साफ और स्वस्थ बनाने के लिए केवल सरकार के प्रयास काफी नहीं हैं। इसके लिए दिल्ली के लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। अगर सरकार और आम लोग मिलकर प्रदूषण कम करने की दिशा में काम करें तो दिल्ली की हवा को और बेहतर बनाया जा सकता है।

साफ हवा वाले दिनों की बढ़ती संख्या उम्मीद की बड़ी वजह
दिल्ली में 2016 में जहां केवल 94 साफ हवा वाले दिन दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या 172 और 2026 में 15 सितंबर तक 179 हो गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि साफ हवा वाले दिनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। हालांकि दिल्ली को प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए अभी लंबे समय तक लगातार काम करने की जरूरत है। खासकर सर्दियों के मौसम में राजधानी में प्रदूषण की समस्या फिर गंभीर हो सकती है। ऐसे में सरकार के सामने साफ हवा को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी होगी।

दिल्ली को साफ और स्वस्थ बनाने की कोशिश
दिल्ली सरकार ने दोहराया है कि राजधानी की हवा को बेहतर बनाना लंबे समय की प्राथमिकता है। सरकार का जोर लगातार कार्रवाई, धूल पर नियंत्रण, वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा प्रबंधन और लोगों की भागीदारी पर रहेगा। 179 साफ हवा वाले दिनों का आंकड़ा दिल्ली के लिए निश्चित रूप से एक सकारात्मक खबर है। अब सरकार के सामने इस सुधार को आगे बढ़ाने और आने वाले वर्षों में साफ हवा वाले दिनों की संख्या को और बढ़ाने की चुनौती है।

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