
सरिता साहनी
8 दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यूपी के ऊर्जा राज्य मंत्रीसोमेन्द्र तोमर ने मेरठ के एक गांव में दलित समाज की ज़मीनों पर योजनाबद्ध तरीके से कब्ज़ा किया है। संजय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ़ एक आरोपनहीं बल्कि दस्तावेज़ों और सरकारी प्रमाणपत्रों के आधार पर सिद्ध सच है, जिसे अब पूरे देश के सामने लाने का समय आ गया है।
दलितों की ज़मीन हड़पने की पूरी साज़िश तैयार की गई – संजय सिंह का आरोप
संजय सिंह के अनुसार मंत्री ने दलितों की 47 ज़मीनों को एक ऐसी योजना के अंतर्गत खरीदा, जिसे बिना सरकारी सिस्टम के दुरुपयोग के अंजाम देनासंभव नहीं था। उन्होंने कहा कि ज़मीन खरीदने की प्रक्रिया इतनी तेज़ी और समान ढंग से हुई कि यह साफ़ हो गया कि सब कुछ पहले से तय था।सामान्य परिस्थितियों में दलित समाज की ज़मीन खरीदने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होती है, लेकिन जिन दस्तावेज़ों की वे बात कर रहे थे, उनमें दिखाया गया है कि किसी महामारी की तरह एक ही गांव के लोग अचानक गंभीर बीमार घोषित हो गए, और फिर उन्हें ज़मीन बेचने की अनुमतिमिल गई।
अंकुश चौधरी ने खोला पूरा मामला-47 दलितों को कैसे बीमार दिखाया गया
संजय सिंह के बाद आम आदमी पार्टी के नेता अंकुश चौधरी ने विस्तार से पूरा मामला पत्रकारों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि कायस्थ गौंडी गांवके 47 दलित परिवारों की ज़मीनें एक ही मंत्री ने खरीदीं। पर सवाल यह है कि ऐसा हुआ कैसे? उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार दलित समाज केव्यक्ति को अपनी ज़मीन बेचने के लिए या तो गंभीर बीमारी का प्रमाण देना होता है, या फिर यह साबित करना होता है कि वह रोज़ी-रोटी के लिएगांव छोड़कर दूसरे शहर जा रहा है। लेकिन यहां स्थिति अजीब थी। अगस्त से सितंबर 2024 के बीच एक ही गांव के दर्जनों लोग अचानक गंभीरबीमार घोषित कर दिए गए। 11 लोग एक ही दिन में बीमारी का सर्टिफिकेट लेने पहुंचे, फिर कुछ दिन बाद 35 लोग। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा गांवकिसी अजीब बीमारी की चपेट में आ गया हो। मेडिकल टीम ने 37 लोगों को गंभीर बीमार घोषित कर दिया, और 9 लोगों को विस्थापित बताया।यह सब दस्तावेज़ों में दर्ज है। यही नहीं, इन सभी लोगों को कुछ ही दिनों में जिलाधिकारी के अधिकार पर परमिशन मिल गई, और 47 लोगों कीज़मीन का बैनामा सिर्फ़ एक ही दिन—13 सितंबर 2024 को कर दिया गया।
सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का गंभीर आरोप—एक ही दिन में सभी ज़मीनें मंत्री के नाम
पूरा मामला इस वजह से और भी संदिग्ध हो जाता है क्योंकि 47 बैनामे एक ही दिन में मंत्री के नाम पर दर्ज हुए। अंकुश चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ़संयोग नहीं हो सकता। यह वही इलाका है जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक इंटीग्रेटेड टाउनशिप का शिलान्यास कर चुके हैं। मंत्री को पहले सेजानकारी थी कि कहां कौन-सा प्रोजेक्ट आ रहा है, और इसी जानकारी का फायदा उठाकर उन्होंने औने-पौने दामों में दलितों की ज़मीनें खरीद लीं।उन्होंने कहा कि दलित समाज के लोग इतने गंभीर बीमार थे तो मंत्री ने उनकी मदद क्यों नहीं की? उनकी दवाई क्यों नहीं करवाई? बल्कि उन्होंनेउनकी मजबूरी का फायदा उठाया। यह किसी मंत्री का चरित्र नहीं हो सकता जो गरीब और दलित के हितों की रक्षा करने की शपथ लेता है।
सत्य उजागर होने पर मंत्री का जवाब—5 करोड़ का मानहानि नोटिस
अंकुश चौधरी ने कहा कि इस घोटाले का खुलासा करने के बाद मंत्री पर कार्रवाई तो नहीं हुई, बल्कि उल्टा आम आदमी पार्टी के नेताओं को 5 करोड़रुपये की मानहानि का नोटिस भेज दिया गया। उनका कहना था कि हम बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए अधिकारों को जानते हैं औरदलित समाज का शोषण किसी भी हाल में नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि चाहे मंत्री 5 करोड़ का नोटिस दें या 50 करोड़ का, हम सड़कों पर भी लड़ेंगेऔर संसद में भी आवाज़ उठाएंगे।
सुनियोजित साज़िश के बिना यह संभव नहीं था
संजय सिंह ने कहा कि अगर 47 दलित लोग सच में बीमार थे, तो मंत्री ने उनके इलाज के लिए क्या किया? उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर सभी लोगएक ही व्यक्ति के पास अपनी ज़मीन बेचने क्यों पहुंचे? यह दिखाता है कि यह पूरा मामला सोचे-समझे तरीके से चलाया गया। उन्होंने कहा कि आमआदमी पार्टी इस लड़ाई को सिर्फ़ मेरठ तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि संसद तक ले जाएगी और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन भी करेगी।
वंदे मातरम् को लेकर भाजपा पर तीखा प्रहार-देशभक्ति को ढाल मत बनाओ
पत्रकारों द्वारा वंदे मातरम् पर सवाल पूछे जाने पर संजय सिंह ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हर कार्यक्रम मेंभारत माता की जय और वंदे मातरम् का नारा लगाती है। लेकिन सवाल यह है कि जब भगत सिंह, बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान जैसे क्रांतिकारीवंदे मातरम् बोल रहे थे, तब आरएसएस और भाजपा के राजनीतिक पूर्वज क्या कर रहे थे? उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सावरकर, श्यामाप्रसाद मुखर्जी और अन्य नेताओं ने अंग्रेजों के साथ मिलकर ऐसे फैसले लिए जो आज भी सवाल खड़े करते हैं। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा अपनाहर गुनाह वंदे मातरम् और धर्म के नारों के पीछे छिपाने की कोशिश करती है। जबकि देशभक्ति का मतलब देश को बेचना नहीं, बल्कि उसकी रक्षाऔर उसकी संपत्ति को बचाना है।
देशभक्ति का मतलब मातृभूमि की वंदना है, न कि उसे बेच देना
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने एयरपोर्ट, सीपोर्ट, जंगल, खदानें, रेल, गैस, पानी—सब बेच दिया। उन्होंने भागलपुर का जिक्र करते हुए कहा किएक रुपये में 1050 एकड़ जमीन और 10 लाख पेड़ अडानी को दे दिए गए। उन्होंने कहा कि यह कैसा वंदे मातरम् है जहां मातृभूमि को ही बेच दियाजाता है?
धार्मिक नारों से नाकामी छिपाने की राजनीति पर करारा हमला
उन्होंने कहा कि भाजपा के एक मंत्री के पास जब लोग बिजली की समस्या लेकर गए तो उसने जय श्रीराम और जय बजरंगबली कहकर बात टाल दी।संजय सिंह ने पूछा कि क्या भगवान ने आपको बताया है कि जनता को बिजली न दो और धर्म के नारों की आड़ में अपनी नाकामियां छिपाओ?
सच्चाई दबेगी नहीं, हम लड़ाई जारी रखेंगे
संजय सिंह ने कहा कि चाहे मंत्री नोटिस भेजें, चाहे धमकाएं, आम आदमी पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। वे संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे कोउठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दलितों की ज़मीन पर कब्ज़ा सिर्फ़ एक कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय है, और इस अन्याय के खिलाफ हरकीमत पर लड़ाई लड़ी जाएगी।