
दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट की बदहाली को लेकर देवेंद्र यादव का भाजपा सरकार पर हमला
नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जिसे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ता और बेहतर कैंसर इलाज देने के उद्देश्य से बनाया गया था, आज खुद बदहाल स्थिति में नजर आ रहा है। देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में लगाई गई करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी के कारण लंबे समय से बंद पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि जब कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए लगाई गई मशीनों का इस्तेमाल ही नहीं हो पा रहा है, तो इसका सीधा नुकसान गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
करोड़ों रुपये की मशीनें बंद होने का आरोप
देवेंद्र यादव ने कहा कि वर्ष 2017 में लगभग 15.42 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल साइक्लोट्रॉन और अन्य हाई-एंड मशीनें दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में लगाई गई थीं। लेकिन उनके अनुसार, प्रशिक्षित मैनपावर की कमी के कारण ये मशीनें अप्रैल 2022 से बंद पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में आधुनिक मशीनों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर करोड़ों रुपये खर्च करके मशीनें खरीदी जाएं और बाद में कर्मचारियों की कमी के कारण उनका इस्तेमाल ही न हो, तो यह सरकारी व्यवस्था की बड़ी कमी है। देवेंद्र यादव ने इसी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि जिस अस्पताल को कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए बनाया गया था, उसकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि अस्पताल खुद ही कैंसर से पीड़ित है।
मरीजों की संख्या में कमी का दावा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में पहले प्रतिदिन करीब 1500 मरीज इलाज के लिए आते थे, लेकिन अस्पताल की व्यवस्थाएं खराब होने के कारण अब यह संख्या घटकर लगभग 500 मरीज प्रतिदिन रह गई है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में स्वीकृत पदों में से 40 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल की सेवाओं पर असर पड़ रहा है और मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देवेंद्र यादव ने कहा कि अस्पताल में वर्ष 2018 से नियमित निदेशक की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा भी गंभीर है। उनके अनुसार, इससे पता चलता है कि दिल्ली की सरकारों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई।
कीमोथेरेपी वार्ड और दूसरी सुविधाओं पर सवाल
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में कई कीमोथेरेपी वार्ड बंद पड़े हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में करोड़ों रुपये की मशीनें मौजूद होने के बावजूद उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुफ्त इलाज के दावों के बावजूद मरीजों को पेट का सीटी स्कैन, दूसरे जरूरी टेस्ट और दवाइयां बाहर से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं। कांग्रेस नेता ने अस्पताल की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में छतों से वेंट लटक रहे हैं और वेटिंग एरिया में गंदगी तथा बदबू की समस्या दिखाई देती है।
दिल्ली के 38 सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल
देवेंद्र यादव ने कहा कि समस्या केवल दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, दिल्ली सरकार के सभी 38 सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, सर्जनों और नर्सों के बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। कर्मचारियों की कमी का असर सीधे मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। देवेंद्र यादव ने कहा कि डॉक्टरों की भारी कमी के कारण कुछ अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर और वेंटिलेटर तक बंद पड़े हैं। उन्होंने इसे भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार के विकसित मॉडल पर सवाल बताते हुए कहा कि अगर अस्पतालों में जरूरी डॉक्टर और नर्स ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो मरीजों को बेहतर इलाज कैसे मिलेगा।
डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल
देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार के डिजिटल हेल्थ केयर सिस्टम को लेकर किए गए दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करने की बात कही थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सामने आई स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े किए हैं। देवेंद्र यादव के अनुसार, हाईकोर्ट ने नेक्स्टजेन हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) और दिल्ली ICU बेड सारथी ऐप से जुड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि 7 अगस्त के आदेश में दिल्ली के सभी 38 सरकारी अस्पतालों में प्रवेश, ओपीडी, आईपीडी और डिस्चार्ज जैसी सेवाओं के लिए नेक्स्टजेन एचएमआईएस सिस्टम को समान रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए।
हाईकोर्ट और सीएजी रिपोर्ट का भी हवाला
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट और सीएजी रिपोर्ट में भी कई सवाल सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट को दी गई रिपोर्ट में 26 सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये के जीवन रक्षक उपकरण कर्मचारियों की कमी और तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े होने की बात सामने आई है। देवेंद्र यादव ने कहा कि अगर अस्पतालों में जीवन बचाने वाले उपकरण मौजूद हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल कर्मचारियों की कमी या तकनीकी खराबी के कारण नहीं हो पा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान मरीजों को होता है।
आम आदमी पार्टी और भाजपा दोनों पर निशाना
देवेंद्र यादव ने दिल्ली की पिछली आम आदमी पार्टी सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारों को गंभीरता से काम करना चाहिए था। उनके अनुसार, आम आदमी पार्टी के शासन के दौरान भी कैंसर इंस्टीट्यूट और सरकारी अस्पतालों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और अब भाजपा सरकार भी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने में असफल दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बावजूद अगर अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, मशीनों के बंद रहने, दवाइयों की समस्या और जांच सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
गरीब मरीजों पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा असर
देवेंद्र यादव ने कहा कि सरकारी अस्पतालों पर सबसे ज्यादा निर्भरता गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों की होती है। ऐसे मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने की स्थिति में नहीं होते। उन्होंने कहा कि जब सरकारी अस्पताल में मशीनें बंद हों, डॉक्टरों और नर्सों के पद खाली हों और जरूरी जांच या दवाइयां उपलब्ध न हों, तो मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों या बाहर की जांच सुविधाओं का सहारा लेना पड़ता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को केवल घोषणाओं और दावों तक सीमित न रहकर अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, सर्जन और तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध कराने, बंद मशीनों को चालू करने और मरीजों को जरूरी दवाइयां तथा जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की जरूरत
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार को सरकारी अस्पतालों की जमीनी स्थिति की जांच करनी चाहिए। बंद पड़ी मशीनों को जल्द से जल्द चालू किया जाना चाहिए और खाली पदों को भरा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में साफ-सफाई, दवाइयों, जांच, ऑपरेशन और आपातकालीन सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं हर मरीज को आसानी से मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर बेहतर और सस्ता इलाज मिले।