
भाजपा सरकार के एजेंडे पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने जताई चिंता
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आज कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि रेखा गुप्ता सरकार द्वारा दिल्ली के स्कूलों में आरएसएसका इतिहास पढ़ाने का कदम स्कूली बच्चों के प्रभावशाली दिमागों को प्रभावित करने वाला और खतरनाक कदम है। यादव ने कहा कि भाजपा अपनेएजेंडे के तहत राष्ट्रनीति शिक्षा योजना के माध्यम से कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों पर ऐसी सामग्री थोपने की तैयारी कर रही है, जिसमें स्वतंत्रता संग्रामकी आड़ में आरएसएस के समर्थकों की जीवनी और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि आरएसएस का इतिहासस्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाला नहीं रहा, जबकि शिक्षा विशेषज्ञ इस कदम से नाराज हैं और इसे बच्चों के भविष्य के लिए हानिकारकमानते हैं।
आरएसएस की भूमिका को प्रमुखता देना छात्रों के लिए सीमित सोच को जन्म देगा
देवेंद्र यादव ने पूछा कि क्या आरएसएस को शामिल करके छात्रों को देश और सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ बढ़ेगी, या यह छात्रों को संकीर्ण औरसीमित सोच में बांधने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा आरएसएस के 22 वर्ष के इतिहास को भारत के पुराने इतिहास और स्वतंत्रतासंग्राम पर हावी करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि राष्ट्रनीति शिक्षा नीति को 18 सितंबर, 2025 को शुरू कियागया तो इसका उद्देश्य लोकतंत्र, शासन और बेहतर नागरिकता की जानकारी देना था। लेकिन अब इसमें आरएसएस की विचारधारा जोड़ने से संविधानद्वारा दी गई विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की संतुलित शक्तियों पर भी प्रश्न उठते हैं।
शिक्षा और इतिहास विशेषज्ञ नाराज
देवेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा विशेषज्ञ और इतिहासकारों ने स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भूमिका को कभी महत्व नहीं दिया। उनका कहना थाकि स्वतंत्रता मिलने से पहले 22 वर्ष तक आरएसएस अंग्रेजों और सामंतों के हित में काम करता रहा। इसके कारण, भाजपा द्वारा छात्रों को यहइतिहास पढ़ाना देश में समानता और सामाजिकता को खत्म करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि यह कदम छात्रों के भविष्य और दिल्ली के स्कूलों की प्रतिष्ठा को बर्बाद कर देगा, जिससे बच्चे संकीर्ण मानसिकता और सीमितदृष्टिकोण के तहत जीवन को देखेंगे।
युवा मस्तिष्क पर प्रभाव और देश के विकास पर खतरा
यादव ने जोर देकर कहा कि बच्चों के प्रारंभिक वर्षों में इस प्रकार का सामग्री देना भविष्य की विनाशकारी रणनीति है। उन्होंने कहा कि अगर देशआरएसएस की विचारधारा पर चलता तो आईआईटी, आईआईएम, एम्स और इसरो जैसे संस्थान स्थापित नहीं हो पाते। उन्होंने याद दिलाया किपंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश को विकास और प्रगति की राह पर आगे बढ़ाया और पाठ्यक्रम में संतुलित इतिहास और संविधान का ज्ञान डाला, जिससे आज भारत के युवा विश्व में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
गांधी जी की हत्या और आरएसएस का विवादित इतिहास
देवेंद्र यादव ने कहा कि गांधी जी की हत्या की साजिश में आरएसएस का नाम शामिल था। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस गांधी जयंती परराष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करके अपनी खोई विश्वसनीयता वापस पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसा करना संगठन के सांप्रदायिक इतिहासऔर विवादों को नहीं मिटा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस ने कभी भारतीय संविधान को मान्यता नहीं दी और 51 वर्षों तक अपने नागपुरमुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। 1948 में गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल द्वारा इसे प्रतिबंधित किया गया। यह इतिहास देश केविभाजन और विनाश से जुड़ा है।