
33 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं होने पर कांग्रेस ने जताई चिंता
नई दिल्ली, 17 अगस्त 2026।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के पहले चरण के पूरा होने के बाद चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा करीब 33 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं होने की बात स्वीकार किए जाने से यह साफ होता है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं तक पुनरीक्षण के फॉर्म नहीं पहुंच पाए। देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को समय पर फॉर्म नहीं दिए गए। उनका कहना है कि विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों, गांवों और झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों में रहने वाले लोगों को इस प्रक्रिया में परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि मतदाता सूची में बदलाव की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।
वोट कटने और नाम बदलने की जानकारी पहले देने की मांग
देवेन्द्र यादव ने चुनाव आयोग से मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम जोड़े गए, हटाए गए या एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किए गए, उनकी पूरी जानकारी अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बीएलए-2 को भी इस संबंध में आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि पार्टी स्तर पर भी यह जांच की जा सके कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से बाहर तो नहीं हुआ है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। लोगों को यह पता होना चाहिए कि उनका नाम सूची में है या नहीं और यदि नाम हटाया गया है तो उसका कारण क्या है।
भाजपा पर एसआईआर के नाम पर साजिश का आरोप
देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के पीछे भाजपा का उद्देश्य बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले से ही इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता चुनाव आयोग के सामने रखती रही है। उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रों में कांग्रेस के बीएलए-2 ने घर-घर जाकर लोगों से बातचीत की और पाया कि अनेक परिवारों तक पुनरीक्षण का फॉर्म पहुंचा ही नहीं था। उनके अनुसार, यदि लोगों को फॉर्म ही नहीं मिला तो उनसे फॉर्म जमा करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में सबसे अधिक नुकसान उन गरीब और सामान्य परिवारों को हो सकता है, जो जानकारी और प्रक्रिया की जटिलता के कारण समय पर अपनी जानकारी दर्ज नहीं करा पाए।
2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने पर सवाल
देवेन्द्र यादव ने एसआईआर प्रक्रिया में 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले 24 वर्षों में दिल्ली की आबादी में बहुत बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में दिल्ली की आबादी लगभग 1.44 करोड़, वर्ष 2011 की जनगणना में लगभग 1.68 करोड़ और वर्ष 2026 में लगभग 2.26 करोड़ बताई जा रही है। यादव ने सवाल उठाया कि जब इतने वर्षों में दिल्ली की आबादी में लाखों लोगों की वृद्धि हुई है, तो 2002 की मतदाता सूची में नाम होने को एसआईआर प्रक्रिया में इतना महत्वपूर्ण आधार क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान लाखों लोग दिल्ली में आकर बसे हैं। कई लोगों ने अपने रोजगार, किराए के मकान या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अपना पता भी बदला है। ऐसे लोगों को केवल पुराने रिकॉर्ड के आधार पर परेशानी नहीं होनी चाहिए।
किराए के मकान में रहने वाले लोगों की समस्या भी उठाई
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से आकर रहते हैं। इनमें बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए परिवार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से बहुत से लोग किराए के मकान में रहते हैं और रोजगार या आर्थिक परिस्थितियों के कारण समय-समय पर अपना घर बदलते रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए पता बदलना सामान्य बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कई मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं मिल पाए। उनका कहना है कि यदि ऐसे मतदाताओं का नाम केवल इस कारण से मतदाता सूची से हटाया जाता है कि उन्होंने फॉर्म जमा नहीं किया, तो इससे बड़ी संख्या में पात्र नागरिक प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस के बीएलए-2 ने घर-घर जाकर की जांच
देवेन्द्र यादव ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने प्रत्येक बूथ पर बीएलए-2 नियुक्त किए हैं। इन कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर जाकर एसआईआर प्रक्रिया की स्थिति को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई जगहों पर लोगों ने बताया कि उन्हें पुनरीक्षण का फॉर्म मिला ही नहीं। कांग्रेस का कहना है कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को केवल फॉर्म जमा होने की संख्या पर ध्यान देने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि फॉर्म वास्तव में कितने लोगों तक पहुंचाए गए।
देवेन्द्र यादव ने चुनाव आयोग के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें लगभग सभी घरों तक फॉर्म पहुंचाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि यदि 33 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए हैं, तो फॉर्म वितरण और वास्तविक भागीदारी के बीच की स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।
झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों के मतदाताओं को लेकर चिंता
देवेन्द्र यादव ने विशेष रूप से झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों के मतदाताओं की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन इलाकों में झुग्गियां हटाई गई हैं, वहां रहने वाले कई लोगों को दूसरी जगह स्थानांतरित दिखाया गया है।
उनका दावा है कि कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के वोट को शिफ्ट या हटाए जाने की स्थिति सामने आई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी नागरिक का मतदान का अधिकार केवल प्रशासनिक प्रक्रिया या रिकॉर्ड की कमी के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
2026 की मतदाता सूची को आधार बनाने की मांग
देवेन्द्र यादव ने कहा कि वर्ष 2026 में दिल्ली में जो लोग वैध रूप से मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं, उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता ने किराए का मकान बदलने के कारण अपना पता बदला है या उसके माता-पिता और रिश्तेदारों का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं है, तो केवल इस आधार पर उसका नाम हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि वर्तमान में पंजीकृत मतदाताओं की स्थिति को भी पूरी गंभीरता से देखा जाए और पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की व्यवस्था की जाए।
मतदाता का नाम हटाने से पहले पूरी पारदर्शिता जरूरी
देवेन्द्र यादव ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और मतदाता सूची उसकी नींव है। इसलिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मतदाता को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसका नाम बिना पर्याप्त जानकारी या उचित प्रक्रिया के मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि 33 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं होने की पूरी जानकारी, एसआईआर के दौरान हुए एडिशन, डिलिशन और ट्रांसफर की जानकारी तथा संबंधित रिकॉर्ड अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले राजनीतिक दलों के अधिकृत बीएलए-2 को उपलब्ध कराया जाए।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की
देवेन्द्र यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव के पक्ष में है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गलती या मनमानी से लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी पात्र मतदाताओं के अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए। देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में रहने वाला प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके, यह सुनिश्चित करना चुनाव व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले सभी आपत्तियों और शिकायतों की उचित जांच की जाए और कांग्रेस के बीएलए-2 को भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मतदाता सूची, फॉर्म वितरण और नामों के बदलाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। श्री देवेन्द्र यादव ने चुनाव आयोग से स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल प्रक्रिया संबंधी कमी के कारण मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और स्थानांतरित करने की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक और जांच योग्य होनी चाहिए, ताकि दिल्ली में निष्पक्ष चुनाव और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार को सुनिश्चित किया जा सके।