
सरिता साहनी
04 दिसंबर 2025, नई दिल्ली
कैंसर के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई दिल्ली की चिंता
आईसीएमआर–नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की ताज़ा रिपोर्ट ने दिल्ली में कैंसर की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है। कांग्रेस नेता देवेंद्र यादवके अनुसार दिल्ली में हर वर्ष कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो यह दिखाती है कि राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था बड़े संकट की ओर बढ़रही है। साल 2024 में 28,387 मरीज सामने आए, जबकि 2023 में 27,561 और 2022 में 26,735 मामलों का खुलासा हुआ। यह बढ़तेआंकड़े चिंता पैदा करते हैं और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं।
दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरियाँ खुलकर सामने
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करने के लिए अस्पतालों में संसाधन बेहद सीमित हैं। आधुनिक मशीनें, विशेषज्ञ डॉक्टर और कैंसर केंद्रों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा किदिल्ली में न तो पर्याप्त कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधाएँ हैं और न ही ऐसे अस्पताल जो बड़ी संख्या में मरीजों का समय पर इलाज कर सकें। इन कमियों केकारण मरीजों को या तो निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ता है या इलाज में देरी होने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।
दिल्ली की जहरीली हवा कैंसर के खतरे को और बढ़ा रही है
दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता कई वर्षों से गंभीर समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में मौजूद धूल, रसायन, धुआँ और प्रदूषक तत्वफेफड़ों व अन्य प्रकार के कैंसर के बड़े कारण बन रहे हैं।
देवेंद्र यादव ने कहा कि राजधानी की हवा में मौजूद खतरनाक ज़हरीले तत्व लोगों के स्वास्थ्य को अत्यधिक नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने यह भीबताया कि प्रदूषण, तनाव, मिलावटी खान-पान और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली मिलकर कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी कर रहे हैं।
कैंसर इलाज में सरकार की नाकामी स्पष्ट
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार कैंसर मरीजों के लिए दवाइयों, परीक्षणों और इलाज की सुविधाओं को बढ़ाने में बिल्कुल नाकामरही है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में नकली दवाइयों का धंधा खुलेआम चल रहा है, जिससे मरीज बीमारी से लड़ने के बजाय गलत दवाइयों के कारण अपनीजान गंवा रहे हैं। यह सरकार की गंभीर लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग की कमजोर कार्यप्रणाली को दर्शाता है। दूसरी ओर, गरीब मरीज महंगे निजीअस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते, और सरकारी अस्पतालों की हालत लगातार खराब होती जा रही है।
दिल्ली में कैंसर की बढ़ती संभावनाएँ चौंकाने वाली
आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में हर 6 पुरुषों में से 1 और हर 7 महिलाओं में से 1 व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने कीसंभावना है। पुरुषों में कैंसर के निदान की औसत आयु 58 वर्ष और महिलाओं में 55 वर्ष बताई गई है। इस औसत के अनुसार दिल्ली देश के उनराज्यों में शामिल हो गया है जहां कैंसर का खतरा सर्वाधिक है, और इसका सीधा कारण दिल्ली का खतरनाक वातावरण माना जा रहा है।
आवश्यक उपाय जागरूकता, स्क्रीनिंग और बेहतर सुविधाएँ
देवेंद्र यादव ने कहा कि कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार को पूरे शहर में कैंसरजागरूकता अभियान चलाना चाहिए, अस्पतालों में स्क्रीनिंग सुविधाएँ बढ़ानी चाहिए और आधुनिक कैंसर उपचार केंद्र स्थापित करने चाहिए। इसकेसाथ ही जरूरतमंद मरीजों के लिए मुफ्त दवाइयों और उपचार की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को बचाने के लिए येकदम अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन गए हैं।
जनता की सुरक्षा में विफल रही सरकार
दिल्ली में बढ़ते कैंसर मामलों की भयावह स्थिति साफ बताती है कि प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और दवाइयों की निगरानी मेंसरकार बुरी तरह विफल रही है। देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में बढ़ती बीमारी और बिगड़ते स्वास्थ्य ढांचे के लिए मौजूदा सरकार पूरी तरह जिम्मेदारहै। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी राजधानी के लिए और भी बड़ा संकट बनसकती है।