
सरिता साहनी
नई दिल्ली, 10 मार्च 2026
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। इसी दिशा में दिल्ली सरकार ने एक खास इनोवेशन चैलेंज शुरू किया था, जिसका उद्देश्य ऐसी नई तकनीकों को ढूंढना है जो हवा में मौजूद प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकें। इस पहल के अगले चरण में अब 22 नई और इनोवेटिव तकनीकों को चुन लिया गया है, जिनका जल्द ही दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में ऑन-ग्राउंड ट्रायल किया जाएगा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन तकनीकों का परीक्षण दिल्ली के उन इलाकों में किया जाएगा जहां प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि कौन-सी तकनीक वास्तव में हवा को साफ करने में सबसे ज्यादा असरदार है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में प्रदूषण के खिलाफ बड़ा अभियान
दिल्ली सरकार की यह पहल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि दिल्ली की हवा को साफ और सुरक्षित बनाया जाए ताकि लोगों को बेहतर और स्वस्थ वातावरण मिल सके। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रदूषण से लड़ाई सिर्फ नियम बनाने से नहीं जीती जा सकती, इसके लिए नई तकनीकों और नए विचारों को भी अपनाना जरूरी है। इसलिए सरकार ने इनोवेशन चैलेंज शुरू किया ताकि देशभर के वैज्ञानिक, इंजीनियर और स्टार्टअप अपनी तकनीकें सामने ला सकें।
देशभर से आईं 284 तकनीकें, 22 को मिला ट्रायल का मौका
इस इनोवेशन चैलेंज में देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 284 तकनीकों के प्रस्ताव आए थे। विशेषज्ञों की एक तकनीकी समिति ने इन सभी प्रस्तावों की जांच की। कई चरणों की जांच और चर्चा के बाद इनमें से 22 तकनीकों को ट्रायल के लिए चुना गया। इन तकनीकों को अब दिल्ली के अलग-अलग प्रदूषण हॉटस्पॉट यानी उन जगहों पर लगाया जाएगा जहां हवा में धूल और धुआं ज्यादा होता है। ट्रायल के दौरान वैज्ञानिक तरीके से यह देखा जाएगा कि इन तकनीकों से हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर खास ध्यान
चुनी गई 22 तकनीकों में से 13 तकनीकें ऐसी हैं जो वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करने के लिए बनाई गई हैं। इनमें कई तरह के नए उपकरण शामिल हैं, जैसे ऐसे सिस्टम जो गाड़ियों में लगाकर उनके धुएं को कम किया जा सके। कुछ तकनीकें ऐसी हैं जो बसों, ट्रकों और जनरेटर जैसे बड़े वाहनों में लगाकर प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती हैं। कुछ डिवाइस ऐसे भी हैं जो गाड़ियों के एग्जॉस्ट यानी धुएं के पाइप में लगाकर जहरीली गैसों को कम करने का काम करेंगे। अगर ये तकनीकें सफल रहती हैं तो इन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।
खुले इलाकों की हवा साफ करने के लिए भी नई तकनीकें
बाकी 9 तकनीकें ऐसी हैं जो आसपास की हवा यानी एम्बिएंट एयर को साफ करने के लिए बनाई गई हैं। इनमें ऐसे एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम शामिल हैं जिन्हें सड़कों, औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों और खुले मैदानों में लगाया जा सकता है।
कुछ तकनीकें धूल को दबाने के लिए बनाई गई हैं, जबकि कुछ स्मॉग यानी धुंध को कम करने में मदद कर सकती हैं। इनका उपयोग उन जगहों पर किया जाएगा जहां निर्माण कार्य या औद्योगिक गतिविधियों के कारण धूल और प्रदूषण ज्यादा होता है।
ट्रायल के लिए वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इन तकनीकों का परीक्षण पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। इसके लिए एक तकनीकी समिति ने विस्तार से परीक्षण प्रक्रिया तैयार की है। इस प्रक्रिया में यह तय किया गया है कि किस जगह कौन-सी तकनीक लगाई जाएगी, कितने समय तक उसका परीक्षण होगा और किस तरह से उसके परिणामों को मापा जाएगा। ट्रायल के दौरान प्रदूषण के स्तर, हवा की गुणवत्ता और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों को ध्यान में रखा जाएगा।
दिल्ली सरकार का लक्ष्य – वास्तविक और असरदार समाधान
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस इनोवेशन चैलेंज का उद्देश्य सिर्फ नई तकनीक दिखाना नहीं है, बल्कि ऐसे समाधान ढूंढना है जो वास्तव में जमीन पर प्रदूषण को कम कर सकें। उन्होंने कहा कि जब ये 22 डिवाइस दिल्ली के सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाकों में लगाए जाएंगे, तब सरकार एक ही चीज देखेगी – सबूत। यानी कौन-सी तकनीक हवा में प्रदूषण को लगातार और स्पष्ट रूप से कम करती है और जिसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।
प्रदूषण से लड़ने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है सरकार
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए कई स्तरों पर एक साथ काम कर रही है। इसमें हवा की गुणवत्ता की बेहतर निगरानी, प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नई तकनीकों को बढ़ावा देना शामिल है। सरकार चाहती है कि दिल्ली एक ऐसा शहर बने जहां सख्त नियम और आधुनिक तकनीक दोनों मिलकर प्रदूषण को कम करें।
ट्रायल के नतीजों से तय होगा आगे का रास्ता
जब इन तकनीकों का ट्रायल शुरू होगा तो पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियां लगातार इनके प्रदर्शन पर नजर रखेंगी। हर डिवाइस से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाएगी। इन ट्रायल के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन-सी तकनीक सबसे ज्यादा प्रभावी है और उसे दिल्ली में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।
दिल्ली को साफ हवा देने की दिशा में अहम कदम
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली के लोगों को साफ और सुरक्षित हवा देना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इनोवेशन चैलेंज के जरिए नई तकनीकों को मौका देकर सरकार प्रदूषण से लड़ाई को और मजबूत बना रही है। अगर ये तकनीकें सफल होती हैं तो आने वाले समय में दिल्ली की हवा को साफ करने में इनकी बड़ी भूमिका हो सकती है और राजधानी देश के लिए एक क्लीन-एयर मॉडल बन सकती है।