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सरिता साहनी
07 
दिसंबर 2025, नई दिल्ली

दिल्ली सरकार का व्यापक मिशन साफ़ हवासुरक्षित भविष्य
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए एक बड़े और लगातार चलने वाले अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व मेंयह मिशन अब पूरे साल चलने वाला कार्यक्रम बन चुका है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठककर स्पष्ट किया कि प्रदूषण रोकने के लिए अब किसी भी विभाग या एजेंसी की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

इंडस्ट्रीज़ का सात दिन में सर्वे गैरअनुरूपित यूनिट्स पर ज़ीरो टॉलरेंस
बैठक में सबसे अहम निर्णय यह लिया गया कि दिल्ली के सभी ज़िलों में मौजूद इंडस्ट्रीज़ का पूरा सर्वे सिर्फ़ सात दिनों में पूरा किया जाए। इसकाउद्देश्य यह है कि कौन-सी इंडस्ट्रीज़ कानूनी नियमों का पालन नहीं कर रहीं, उनकी तुरंत पहचान हो सके। कई इलाकों में बिना अनुमति, रिहायशी क्षेत्रोंमें या गैर-अनुरूपित ज़ोन में चल रही इंडस्ट्रीज़ प्रदूषण का बड़ा कारण बनती हैं। इसलिए मंत्री सिरसा ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी यूनिट्स पर तुरंतकार्रवाई हो और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें बंद भी किया जाए।

MCD को मैदानस्तर पर निरीक्षण का आदेश
MCD के डिविजनल कमिश्नर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे नॉन-कनफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल एरिया और दिल्ली में चल रही सभी निर्माण साइट्सका विस्तृत सर्वे करवाएँ। निर्माण स्थलों पर धूल उड़ना, कचरे का सही प्रबंधन न होना और सुरक्षा उपायों की कमी जैसे कारणों से प्रदूषण बढ़ जाताहै। इसलिए अब हर निर्माण स्थल की जाँच होगी और जहाँ भी नियमों का पालन नहीं मिलेगा, वहाँ जुर्माने और सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।

सड़कों और खाली प्लॉट्स से उठने वाली धूल पर सख़्त नियंत्रण
दिल्ली की हवा में धूल की बड़ी मात्रा सड़कों की खराब स्थिति और खाली पड़े प्लॉट्स में जमा होती मिट्टी के कारण फैलती है। पर्यावरण मंत्री ने सभीविभागों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी स्थानों की पूरी सूची तुरंत तैयार की जाए। सड़क की मरम्मत के काम को तेज़ किया जा रहा है और गड्ढों को भरनेकी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। इस साल अब तक 42,000 से अधिक गड्ढे भरे जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भीअधिक है। यह धूल नियंत्रण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

DPCC की सख़्त कार्रवाई जुर्माने और साइट्स बंद करने से बढ़ी जवाबदेही
पिछले कुछ दिनों में DPCC की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। इन निरीक्षणों में कई निजी और सरकारी दोनों तरह की एजेंसियाँ नियमों कापालन करते नहीं पाई गईं। 1,756 निर्माण स्थलों की जाँच में 556 नोटिस जारी किए गए और लगभग सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।इसके साथ ही 48 निर्माण साइट्स को बंद किया गया। सरकारी एजेंसियों जैसे DDA, DSIIDC, MCD, PWD और DMRC पर भी नियमों केउल्लंघन के चलते एक करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया गया। यह पहली बार है जब सरकारी विभागों पर भी इतनी कड़ी कार्रवाई हुई है, जिससे यहसंदेश गया है कि कानून सबके लिए बराबर है।

रिहायशी इलाकों में अवैध इंडस्ट्रीज़ पर निगरानी बढ़ी
दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति इंडस्ट्रीज़ चलती रही हैं, जो हवा में धुआँ और जहरीले तत्व छोड़कर लोगों की सेहत को नुकसानपहुँचाती हैं। DPCC की टीमें ऐसे स्थानों की नियमित पहचान कर रही हैं। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि रिहायशी क्षेत्रों में अवैध इकाइयों को किसी भीकीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा और इन पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

सड़क निर्माणसफ़ाई और EV नीति से मिली नई गति
दिल्ली सरकार ने सड़क निर्माण और सफ़ाई पर भी तेज़ी से काम किया है। साफ़ सड़कों से न सिर्फ़ धूल कम फैलती है बल्कि शहर का जीवन भीबेहतर होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का असर भी साफ़ दिख रहा है। दिसंबर 2024 में दिल्ली में 3.46 लाखइलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 4.54 लाख हो गए। यह वृद्धि बताती है कि दिल्ली की EV नीति सफल हो रही है औरइससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है।

खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर पूरी तरह रोक
खुले में कचरा या बायोमास जलाना भी प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। इसे रोकने के लिए 1,823 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें से 633 टीमेंविशेष रूप से ओपन बर्निंग रोकने में लगी हैं। दिल्ली सरकार मजदूरों को ठंड से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर भी वितरित कर रही है ताकि वे आगजलाने पर मजबूर न हों। अब तक 1,407 RWAs को 3,377 हीटर दिए जा चुके हैं और कुल 10,000 हीटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

वैज्ञानिक अध्ययन और इनोवेशन से मिलेगा भविष्य का समाधान
दिल्ली सरकार IIT Delhi और IITM के साथ मिलकर एक सोर्स एपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने जा रही है, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा किदिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोत कौन से हैं। साथ ही सरकार द्वारा शुरू किए गए इनोवेशन चैलेंज में 278 सुझाव आए, जिनमें से 200 को आगे कीप्रक्रिया के लिए चुना गया है। विशेषज्ञ इन सुझावों का मूल्यांकन करेंगे ताकि प्रदूषण कम करने के नए और प्रभावी उपाय लागू किए जा सकें।

जनरेटरों पर सख़्त नियम रेट्रोफिटिंग अनिवार्य
BS-IV और उससे नीचे के सभी जनरेटरों में एंटी-पॉल्यूशन डिवाइस लगाना अब ज़रूरी कर दिया गया है। बिना रेट्रोफिटिंग के कोई भी जनरेटर चलानेकी अनुमति नहीं होगी। यह बदलाव दिल्ली की हवा को साफ़ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सभी विभागों और नागरिकों की संयुक्त ज़िम्मेदारी
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट कहा है कि दिल्ली की हवा को साफ़ करना सिर्फ़ सरकार का काम नहीं, बल्कि सभी विभागों, एजेंसियोंऔर नागरिकों की ज़िम्मेदारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विज़न के अनुसार दिल्ली को ऐसा शहर बनाना है जहाँ साफ़ हवा सिर्फ़ सपना न रहे, बल्किलोगों की रोज़मर्रा की हकीकत बने। यह अभियान दिल्ली की हवा को सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आने वालेसमय में इसके और अधिक सकारात्मक परिणाम देखने की उम्मीद है।




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