
सरिता साहनी
02,दिसंबर 2025, नई दिल्ली
डिजिटल दस्तावेज़ों के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहल
दिल्ली विधानसभा में इस बार एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परिवर्तन शुरू किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अबविधानसभा में तैयार होने वाला हर डिजिटल दस्तावेज़ पर्यावरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। उनका कहना है कि जब सरकारी संस्थाएँखुद पेपरलेस होंगी, तभी समाज में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसी सोच के साथ विधानसभा ने अपने सभी दस्तावेज़ों, प्रक्रियाओं और कार्यों को डिजिटल रूप में बदलने का फैसला लिया है।
शीतकालीन सत्र से पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रणाली
आगामी शीतकालीन सत्र में दिल्ली विधानसभा में अब कोई भी कागज़ी दस्तावेज़ उपयोग में नहीं आएगा। चाहे प्रश्न हों, विधेयक हों, प्रस्तुत पत्र होंया अन्य सभी विधायी कार्य सब कुछ डिजिटल प्रणाली के माध्यम से होगा। यह बदलाव केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि समय की मांग है।अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि डिजिटल कामकाज से विधानसभा की गति बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और दस्तावेज़ों का प्रबंधन अधिक सरलऔर सुरक्षित होगा।
अधिकारियों को नेवा (NEVA) पर डिजिटल प्रशिक्षण
इस बदलाव को सफल बनाने के लिए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दिल्ली विधानसभा में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन(NEVA) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। IT विभाग के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को यह सिखाया कि विधानसभा के सभी दस्तावेज़ कैसेऑनलाइन तैयार किए जाएँगे, कैसे भेजे जाएँगे और किस प्रकार डिजिटल मॉड्यूल के माध्यम से विधानसभा से समन्वय स्थापित किया जाएगा।सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, सहकारी विभाग, श्रम, रोजगार, विधि, न्याय, चुनाव, विकास, संस्कृति, भाषा, पर्यटन, उद्योग, खाद्य–आपूर्ति और पर्यावरण एवं वन विभाग के अधिकारी इस प्रशिक्षण में शामिल हुए। शेष विभागों को अगले दिन प्रशिक्षण दिया जाएगाताकि सभी विभाग पूरी तरह डिजिटल रूप में काम करने के लिए सक्षम हो सकें।
पेपरलेस विधानसभा की दिशा में बड़ा कदम
विधानसभा अध्यक्ष ने इस कार्यक्रम में विश्वास जताया कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से कागज़ की भारी मात्रा की बचत होगी। उन्होंने कहा कि जबसभी दस्तावेज़ डिजिटल होंगे, तो विभागों और विधानसभा के बीच संवाद तेज बनेगा। उत्तर भेजने की प्रक्रिया में देरी नहीं होगी और पूरा काम समयबद्धतरीके से पूरा होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कागज़ रहित व्यवस्था न केवल पर्यावरण हितैषी है, बल्कि विधानसभा को और अधिकआधुनिक, संवेदनशील और सक्षम बनाती है। यह बदलाव सुशासन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने की पहल
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डिजिटल प्रणाली से विधानसभा की प्रक्रियाएँ और अधिक पारदर्शी बनेंगी। अब दस्तावेज़ों के खोने, गड़बड़ी होने या देरी सेपहुँचने की समस्या नहीं रहेगी। हर जानकारी सुरक्षित रहेगी और आसानी से खोजी जा सकेगी। इससे विधानसभा का कामकाज अधिक व्यवस्थित होगाऔर जनता के प्रति जवाबदेही भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल व्यवस्था अपनाने से विधायी प्रक्रिया का स्तर बढ़ेगा और यह सुधार देश कीअन्य विधानसभाओं के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।
भविष्य की ओर बढ़ता दिल्ली विधानसभा सचिवालय
दिल्ली विधानसभा ने स्पष्ट किया है कि वह एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रही है जहाँ हर दस्तावेज़ डिजिटल होगा, हर प्रक्रिया समयबद्ध होगी और हरकदम पर पारदर्शिता का पालन होगा। विधानसभा सचिवालय ने यह संकल्प दोहराया कि वह पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के साथ-साथलोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विभागों की सक्रिय भागीदारी के साथ दिल्लीविधानसभा पूरी दृढ़ता के साथ एक पेपरलेस व्यवस्था की ओर आगे बढ़ रही है, जो आने वाले वर्षों में पूरे देश के लिए आदर्श बन सकती है।