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दिल्ली विश्वविद्यालय के छह कॉलेजों के विद्यार्थियों ने किया विधानसभा का दौरा

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026।

दिल्ली विश्वविद्यालय के छह प्रमुख महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने सोमवार को दिल्ली विधानसभा का भ्रमण किया और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से संवाद किया। यह कार्यक्रम दिल्ली विधानसभा सचिवालय की ओर से आयोजित युवा संपर्क कार्यक्रम के तहत किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था, विधानसभा की कार्यप्रणाली और विधायी प्रक्रियाओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी देना था। इस अवसर पर हिंदू कॉलेज, शहीद भगत सिंह कॉलेज, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज यानी सीवीएस, श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज, मिरांडा हाउस और रामजस कॉलेज के विद्यार्थी दिल्ली विधानसभा पहुंचे। विद्यार्थियों ने विधानसभा परिसर को देखा और वहां होने वाली विधायी गतिविधियों को समझने का अवसर प्राप्त किया।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के सवाल सुने और लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विधानसभा की कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने विधानसभा अध्यक्ष से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। एक विद्यार्थी ने विजेंद्र गुप्ता से पूछा कि सदन का प्रभावी संचालन करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष में सबसे जरूरी गुण क्या होना चाहिए। इस सवाल का जवाब देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जटिल संसदीय परिस्थितियों से निपटने के लिए विधानसभा अध्यक्ष का सबसे जरूरी गुण धैर्यवान होना है। उन्होंने बताया कि सदन में अलग-अलग विचार और मत रखने वाले सदस्य मौजूद होते हैं। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष को सभी पक्षों को सुनते हुए धैर्य के साथ सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाना होता है।

घटती भागीदारी को लेकर विजेंद्र गुप्ता ने जताई चिंता
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि विधायी संस्थाओं में सदस्यों की भागीदारी कम होती जा रही है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सदन में केवल चर्चा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चर्चा सार्थक और गंभीर भी होनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार शोर-शराबे के कारण महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाला सार्थक विमर्श दब जाता है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही और विधानसभा के सत्रों में बहुत कम सदस्य सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की कम उपस्थिति को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।

युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ने की जरूरत
युवा संपर्क कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं के करीब लाना है। कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किताबों और कक्षा में मिलने वाले सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने का अवसर भी मिले, इसी उद्देश्य से इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि विधानसभा में किस तरह कानून बनाए जाते हैं। उन्हें विधेयक पेश करने, उस पर चर्चा करने, बहस करने और उसे कानून का रूप देने की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिली कि सरकार और विधानसभा के स्तर पर नीतियों और कानूनों को किस तरह तैयार किया जाता है। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू हुए विद्यार्थी
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने दिल्ली विधानसभा के ऐतिहासिक परिसर का भी भ्रमण किया। विद्यार्थियों को वर्ष 1912 से जुड़े ऐतिहासिक विधानसभा परिसर की जानकारी दी गई। निर्देशित भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को भवन की ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत के बारे में बताया गया। उन्हें बताया गया कि इस परिसर का संबंध तत्कालीन केंद्रीय विधान सभा और देश के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से रहा है। विद्यार्थियों को श्री विट्ठलभाई पटेल जैसे प्रमुख नेताओं और भारतीय लोकतांत्रिक एवं विधायी इतिहास में उनके योगदान के बारे में भी जानकारी दी गई। ऐतिहासिक भवन को देखकर विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि भारत में विधायी संस्थाओं का विकास किस प्रकार हुआ।

विधेयक से कानून बनने तक की प्रक्रिया समझी
विद्यार्थियों के लिए विधानसभा की विधायी प्रक्रिया को समझना भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उन्हें बताया गया कि जब कोई विधेयक विधानसभा में लाया जाता है तो उसके बाद उस पर किस तरह चर्चा और बहस होती है। विद्यार्थियों को सरल तरीके से समझाया गया कि विधेयक पर सदन में विचार किया जाता है और सदस्यों को अपनी राय रखने का अवसर मिलता है। चर्चा और निर्धारित प्रक्रिया के बाद विधेयक को कानून का रूप दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को जानकर विद्यार्थियों को यह समझ आया कि कानून बनाना एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया है। इसमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और गंभीर चर्चा का विशेष महत्व होता है।

दिल्ली विधानसभा की विकास यात्रा पर दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को दिल्ली विधानसभा की विकास यात्रा पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इस डॉक्यूमेंट्री में वर्ष 1993 से लेकर वर्तमान समय तक दिल्ली विधानसभा के विकास और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से विद्यार्थियों को दिल्ली में विधानसभा व्यवस्था के विकास को समझने का अवसर मिला। उन्हें यह भी बताया गया कि समय के साथ दिल्ली विधानसभा की भूमिका और कार्यप्रणाली में किस प्रकार बदलाव आया है। इस दौरान विद्यार्थियों ने दिल्ली की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को करीब से समझा।

विद्यार्थियों को दी गई ‘एक शताब्दी यात्रा’ कॉफी टेबल बुक
दिल्ली विधानसभा के भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को स्मारक कॉफी टेबल बुक ‘एक शताब्दी यात्रा’ भी भेंट की गई। यह पुस्तक विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा और उसकी विरासत को समझने में विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रही। पुस्तक के माध्यम से विद्यार्थी दिल्ली विधानसभा से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं और उसकी लंबी यात्रा के बारे में आगे भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य विधानसभा सदन का भी किया भ्रमण
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने दिल्ली विधानसभा के मुख्य सदन का भी भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने उस स्थान को करीब से देखा जहां विधानसभा की महत्वपूर्ण कार्यवाही होती है और जनप्रतिनिधि विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं। मुख्य सदन को देखकर विद्यार्थियों को विधानसभा की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अनुभव मिला। उन्होंने यह जाना कि सदन में विभिन्न विषयों पर किस प्रकार चर्चा होती है और जनहित से जुड़े मुद्दों को किस तरह उठाया जाता है।

शिक्षा और वास्तविक लोकतंत्र के बीच की दूरी कम करने की पहल
युवा संपर्क कार्यक्रम को विद्यार्थियों की शिक्षा और वास्तविक लोकतांत्रिक शासन के बीच की दूरी कम करने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लोकतंत्र के बारे में केवल किताबों से जानकारी मिलने के बजाय वास्तविक संस्थाओं को देखने और समझने का मौका मिलता है। कानून और अन्य विषयों के विद्यार्थियों के लिए इस तरह का कार्यक्रम विशेष रूप से उपयोगी है। इससे उन्हें नीति-निर्माण, कानून बनाने की प्रक्रिया और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे विषयों को वास्तविक रूप में समझने में मदद मिलती है। इस तरह के कार्यक्रम युवाओं में नागरिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारियों और महत्व से भी परिचित कराते हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं से सक्रिय भागीदारी का किया आह्वान
कार्यक्रम के अंत में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनसे अपनी नागरिक जागरूकता को सक्रिय नेतृत्व में बदलने का आह्वान किया। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए जागरूक और सक्रिय युवाओं की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे देश और समाज से जुड़े मुद्दों को समझें, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में रुचि लें और भविष्य में जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र केवल सरकार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें आम नागरिकों और विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी भी बहुत महत्वपूर्ण है।

सक्रिय युवा ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान
दिल्ली विधानसभा में आयोजित यह युवा संपर्क कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से समझने का महत्वपूर्ण अवसर रहा। विद्यार्थियों ने विधानसभा की ऐतिहासिक विरासत देखी, विधायी प्रक्रियाओं को समझा और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से सीधे संवाद किया। विजेंद्र गुप्ता का संदेश भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए सदन में गंभीर चर्चा और सक्रिय भागीदारी जरूरी है। साथ ही युवाओं को भी लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लगातार संवाद, चर्चा, जवाबदेही और सक्रिय नागरिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ने और उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक एवं नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते

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