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दिल्ली हाईकोर्ट के एक मौजूदा जज के घर से करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। आग लगने की घटना के बाद मौके पर पहुंचेदमकल कर्मियों ने जब नोटों का भंडार देखा तो सभी चौंक गए। इस घटना ने न केवल न्यायपालिका बल्कि राजनीति में भी हलचल मचा दी है।

मुख्य न्यायाधीश ने लिया संज्ञान, जज का तबादला
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबादहाईकोर्ट कर दिया है। नकदी बरामदगी के बाद जज को उनके मूल हाईकोर्ट में भेज दिया गया।


राज्यसभा में उठा मुद्दा: सभापति धनखड़ का बयान
यह मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में भी गूंजा, जहां कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने न्यायिक जवाबदेही का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिकामें पारदर्शिता और जवाबदेही की तत्काल आवश्यकता है। इस पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वे इस पर एक संरचित चर्चाआयोजित करने के लिए तंत्र की तलाश करेंगे।

सभापति ने यह भी कहा कि अगर यही घटना किसी राजनेता, नौकरशाह या उद्योगपति से जुड़ी होती, तो संबंधित व्यक्ति तुरंत हिट लिस्ट में आ जाता।उन्होंने सदन के नेता और विपक्ष के नेता से बात करके इस मुद्दे पर विचार-विमर्श का आश्वासन दिया।

भ्रष्टाचार पर पूर्व जज का कड़ा बयान
पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, यह काफी समयसे चला आ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी।

ढींगरा ने कहा, “यह तो ऐसा ही है जैसे किसी थानेदार को भ्रष्टाचार के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया जाए और फिर कुछ समय बाद दूसरी जगहभेज दिया जाए। हम भ्रष्टाचार को स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

पुराने मामलों का हवाला: लंबित भ्रष्टाचार के केस
एसएन ढींगरा ने न्यायपालिका में पुराने भ्रष्टाचार के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस निर्मल यादव का मामला 2008 से चल रहाहै, जबकि शमित मुखर्जी के केस को 25 साल हो गए हैं। न्यायपालिका में ऐसे लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने की जरूरत है।


जस्टिस यशवंत वर्मा का करियर सफर
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 8 अगस्त 1992 से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। अक्टूबर 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जजनियुक्त किया गया और फरवरी 2016 में स्थायी जज बने। 11 अक्टूबर 2021 को उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में जज के रूप में पदभार ग्रहण किया था।


भ्रष्टाचार पर सख्त रुख जरूरी
इस घटना ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। न्यायिक प्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचारपर सख्त रुख अपनाने की मांग जोर पकड़ रही है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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