भाकपा लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा है कि अगर बिहार में अगला विधानसभा चुनाव महागठबंधन जीतता है. तो तेजस्वी यादव हीमुख्यमंत्री बनेंगे उन्होंने यह बात एक इंटरव्यू में कही. दीपंकर भट्टाचार्य ने बताया कि तेजस्वी यादव महागठबंधन का चेहरा हैं और जनता उन्हें हीमुख्यमंत्री के रूप में देखती है उन्होंने यह भी कहा कि भाकपा (माले) इस बार 40 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है पिछले विधानसभाचुनाव में पार्टी को 19 सीटें मिली थीं. जिनमें से उसने 12 पर जीत दर्ज की थी. जब उनसे पूछा गया कि पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो उन्होंनेकहा कि पिछले चुनाव में अगर भाकपा (माले) को ज्यादा सीटें मिलतीं तो महागठबंधन सरकार बना सकता था. कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं. लेकिनवह सिर्फ 19 पर जीती. हमें 19 सीटें मिलीं और हमने 12 पर जीत हासिल की दीपंकर ने कहा कि जहां भाकपा (माले) मजबूत है. वहां आरजेडी औरकांग्रेस को भी फायदा मिलता है.
25 जिलों में रखती है मजबूत उपस्थिति
उन्होंने दावा किया कि पार्टी अब 24 से 25 जिलों में मजबूत उपस्थिति रखती है और अगर इन जगहों से चुनाव लड़ती है तो परिणाम में बदलाव लासकती है. क्या भाकपा (माले) को कांग्रेस के बराबर सीटें मिलनी चाहिए? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कांग्रेस की जमीन परपकड़ बिहार में कमजोर है लेकिन वह राष्ट्रीय पार्टी है और विपक्ष की मुख्य ताकत भी वहीं भाकपा (माले) बिहार में जमीनी संगठन के लिए जानी जातीहै. हम चाहते हैं कि महागठबंधन के सभी घटक दलों की ताकत का सही इस्तेमाल है.तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करनेको लेकर उन्होंने कहा कि तेजस्वी का चेहरा जनता के लिए पहले ही घोषित है. अब घोषित और अघोषित में फर्क नहीं रह गया है महागठबंधन कीजीत हुई तो मुख्यमंत्री तेजस्वी ही होंगे. दीपंकर भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा फिर से नीतीश कुमार ही होंगे औरकहा कि बीजेपी के लिए नीतीश एक मजबूरी हैं। अगर वो मजबूरी में नहीं होते तो बीजेपी के हाथों लोकसभा चुनाव से पहले ‘हाईजैक’ नहीं होते।प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वह अब बीजेपी की ‘बी टीम’ की तरह काम कर रहे हैं और लोगों में अबउनके लिए पहले जैसा उत्साह नहीं बचा है.
बीजेपी पहले थी जातिजनगणना के खिलाफ
जनगणना को लेकर केंद्र सरकार की घोषणा पर उन्होंने कहा कि बीजेपी पहले तो जातिगत जनगणना के खिलाफ थी. लेकिन अब बिहार चुनाव कोदेखते हुए यह ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि लोग जानते हैं कि बीजेपी कहती कुछ है करती कुछ और है. उन्होंने यह भी कहा कि जातिगत जनगणनाके साथ-साथ आरक्षण की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण मिलना चाहिए. वाम दलों की एकता पर उन्होंने कहा कि इसकालक्ष्य अंतिम हो सकता है. लेकिन अभी जरूरत है कि सभी वाम दलों में बेहतर तालमेल हो.