
नई दिल्ली | 25 जुलाई
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा था।
बढ़ते दबाव के बीच लिया गया फैसला
पिछले कई दिनों से विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। राजधानी दिल्ली सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई। बढ़ते जनदबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया।
इस्तीफा पत्र में क्या कहा?
अपने इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनके लिए छात्रों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिखा कि वह नहीं चाहते कि देश की स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बने या छात्रों का भविष्य किसी तरह प्रभावित हो। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया है और इसी भावना से यह निर्णय लिया है।
विपक्ष ने बताया अपनी मांग की जीत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे अपनी मांग और छात्रों की आवाज की जीत बताया। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग भी दोहराई।
सरकार की अगली चुनौती
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार के सामने नया शिक्षा मंत्री नियुक्त करने और शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत करने की चुनौती है। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए जल्द नए कदम उठाएगी।
देशभर में रही इस खबर की चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। छात्र, अभिभावक और राजनीतिक दल अब सरकार के अगले फैसले और शिक्षा व्यवस्था में होने वाले संभावित सुधारों पर नजर बनाए हुए हैं।