हरियाणा के साथ जल विवाद के मुद्दे पर सोमवार को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पानी पर एक बार फिर अपनास्टैंड क्लीयर कर दिया. कहा कि मैं किसी के सामने नहीं झुकूंगा. पंजाब के पानी की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ूंगा. एक बूंद भी अतिरिक्त पानीकिसी को नहीं दूंगा. इधर हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा यदि पंजाब सरकार ने ओछी राजनीति नहीं छोड़ी तो जनता बेदखल कर देगी. विशेष सत्र में छह अहम प्रस्तावों को सर्वसम्मति के साथ मंजूर किया गया. सरकार ने हरियाणा को 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी दिए जाने केबीबीएमबी बोर्ड के 23 और 30 अप्रैल को हुई बैठक में लिए फैसलों को रद्द कर दिया. साथ ही केंद्र के डैम सेफ्टी एक्ट-2021 के खिलाफविधानसभा में प्रस्ताव लाकर सर्वसम्मति से रद्द कर केंद्र को भेज दिया गया. मान ने कहा कि पंजाब के पुनर्गठन के दौरान 1966-67 में बीबीएमबी कागठन किया गया था. लेकिन आज ये एक सफेद हाथी बन चुका है इसे बंद करना देना चाहिए.
तय किए गए मानक
दरअसल 1981 में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल और चंडीगढ़ के बीच पानी के बंटवारे को लेकर जो मानक तय किए गए थे. आजस्थिति उसके बिलकुल विपरित है. मान ने कहा कि नये सिरे से पानी के बंटवारे को लेकर संधि तैयार की जानी चाहिए सीएम ने तर्क दिया किबीबीएमबी के गठन के समय पानी की स्थिति कुछ और थी. आज राज्य के भाखड़ा, रणजीत सिंह और पौंग डैम तीनों में कुल मिलाकर 50 से 55 फीटपानी कम है. मान ने कहा कि रिपेरियन स्टेट के दर्जे में रावी, ब्यास और सतलुज से हरियाणा और राजस्थान का हिस्सा नहीं लगता, फिर भी इन राज्योंको पानी दिया जा रहा है.सीएम मान ने कहा कि पुरानी सरकारों के समय राज्य में केवल 21 प्रतिशत पानी का उपयोग किया जाता था. अब खेतों तकनहरी पानी पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है. 2022 के बाद से पंजाब ने अपने पानी का 60 से 66 प्रतिशत तक इस्तेमाल करना शुरू करदिया है.
69 प्रतिशत किया गया पानी का उपयोग
मान ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पंजाब में पहले पानी के अपने तय कोटे में से वर्ष 2014-15 में 70 प्रतिशत, 2015-16 में 76 प्रतिशत, 2016-17 में 87 प्रतिशत इसी तरह 2021 में 69 प्रतिशत पानी का उपयोग किया. जबकि 2022 के बाद 2024 में 85 और 2025 में अब तकपहली बार पंजाब ने अपने पानी के कोटे में से 91 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल किया है.सीएम मान ने कहा कि हरियाणा में उपजे जल संकट काकारण वह खुद हैं बीते 6 महीने में 6 बार पत्र लिखकर हरियाणा सरकार को पानी के इस्तेमाल को लेकर चेताया गया. लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दियापंजाब अब भी इंसानियत के नाते हरियाणा को पीने के लिए 4500 क्यूसेक पानी दे रहा है जबकि हरियाणा की आबादी के अनुसार 1700 क्यूसेकपानी बनता है. मान ने कहा कि पीने के लिए पानी की मांग में जो पंजाब को 4500 क्यूसेक डिमांड लेटर मिला था, उसमें 680 क्यूसेक पानी लॉसयानी घाटे के लिए दिखाया गया था. तब भी पंजाब ने पीने की अतिरिक्त मांग को पूरा किया है.