
पश्चिम बंगाल के एक निजी मेडिकल कॉलेज में दलित छात्रा के साथ हाल ही में हुई घिनौनी वारदात ने पूरे समाज को हिला कर रख दिया है। छात्रा केसाथ गैंगरेप की यह घटना राज्य में कानून और व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है। राज्य की मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ममता बनर्जी कीजिम्मेदारी है कि वे अपने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। लेकिन इस गंभीर घटना के बाद उनका बयान बेहद विवादित रहा। उन्होंने कहाकि महिलाओं को देर रात बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस बयान ने न केवल पीड़िता को अपमानित किया, बल्कि यह दर्शाता है कि राज्य सरकार कीसंवेदनहीनता और महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान न देने की प्रवृत्ति कितनी गंभीर है।
दुर्गापुर की घटना और प्रशासन की नाकामी
हाल ही में दुर्गापुर में हुई निर्मम घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। राज्य की नीतियाँ और प्रशासनिकसंवेदनहीनता आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, को भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर कर रही हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि ममता बनर्जीने हमेशा माँ, माटी और मानुष का नारा लगाया है। लेकिन उनके कुशासन के कारण आज माँ शर्मिंदा, माटी लहूलुहान और मानुष बेहाल है। राज्य मेंकानून और सुरक्षा की प्रणाली महिलाओं को आश्वस्त नहीं कर पा रही है।
तृणमूल कांग्रेस और महिलाओं के प्रति रवैया
तृणमूल कांग्रेस का रवैया लगातार पिछड़ी सोच का प्रतीक बनता जा रहा है। ममता बनर्जी ने पहले भी कई गंभीर मामलों में महिलाओं के साथ हुएअत्याचार को सामान्य या झूठा साबित करने की कोशिश की है। पार्क स्ट्रीट गैंगरेप मामले में उन्होंने पीड़िता पर शक जताया और इसे झूठा बताने की कोशिश की। 2022 में एक 14 वर्षीय बच्ची के साथ हुए अत्याचार को उन्होंने गलत प्रेम संबंध कहकर मामूली कर दिया। संडेखली की घटना में जबउनके नेताओं ने कई महिलाओं पर हमला किया, तब भी उन्होंने इसे नकारते हुए कहा कि कुछ नहीं हुआ। यह सभी उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि राज्यसरकार और तृणमूल कांग्रेस की नीतियाँ महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनहीन हैं।
समाज और सरकार की जिम्मेदारी
अब समय है कि समाज और सरकार मिलकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। महिलाओं को डर और असुरक्षा के माहौल में जीने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा और ऐसे मामलों में त्वरित और कड़ा कदम उठाना होगा।सुरक्षा, सम्मान औरन्याय केवल कानून का सवाल नहीं है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और उनके अधिकारों कीरक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है।