पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकवाद को प्रायोजित करने, आतंकियों को पनाह देने और उन्हें दुनियाभर में भेजने में पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्डफिर से दुनिया के सामने आ गया है. दशकों से पाकिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल सीमापार आतंकवाद, चरमपंथी विचारधारा के लिए लॉन्चपैड केलिए किया जाता रहा है. कश्मीर से काबुल, मॉस्को से लंदन तक आतंकी हमलों में पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क का खुलासा होता रहा है. भारत कीओर तैयार किए डोजियर में दुनियाभर की आतंकी हमलों का जिक्र किया गया है. इसमें पाकिस्तानी नेताओं के बयानों को भी शामिल किया गयाहै.2018 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संकेतों में कहा था कि 2008 के मुंबई हमलों में पाकिस्तान सरकार की भी भूमिका होसकती है. लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों की ओर से अंजाम दिए गए इस हमले में पाकिस्तान का हाथ सामने आया था. अजमल कसाब जिंदा नपकड़ा जाता तो शायद पाकिस्तान इसे भी झुठला देता पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने भी स्वीकार किया था कि सेना ने जम्मू-कश्मीर मेंभारत से लड़ने के लिए आतंकवादी समूहों को प्रशिक्षण दिया. उन्होंने माना था कि सरकार ने जानबूझकर इसकी अनदेखी की ताकि भारत को वार्ता केलिए मजबूर किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दा उठाया जा सके.
पाकिस्तान करता है आतंकवाद का समर्थन
अभी हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने माना कि देश ने तीन दशकों से अधिक समय तक आतंकवादी समूहों का समर्थनकिया. जिसे उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व वाले विदेश नीति निर्णयों से जुड़ी एक गलती बताया.अफगानिस्तान में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसीआईएसआई अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को वित्तीय सहायता प्रशिक्षण और सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करती रही है. इन समूहों ने अफगाननागरिकों, सरकारी संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय बलों पर कई घातक हमले किए हैं. इनमें 2008 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हमला और 2011 में अमेरिकी दूतावास पर हमला शामिल हैं. वरिष्ठ पत्रकार कार्लोटा गॉल ने अपनी किताब में लिखा कि दूतावास पर बमबारी आईएसआई एजेंट कीकार्रवाई नहीं थी. बल्कि यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अनुमोदित और नियंत्रित की गई कार्रवाई थी.
पाकिस्तान का संबंध आया सामने
रूस की राजधानी मॉस्को में 2024 में हुए कॉन्सर्ट हॅाल हमले की जांच में भी पाकिस्तान का संबंध सामने आया है. रूसी अधिकारियों ने मास्टरमाइंडकी पहचान ताजिक नागरिक के रूप में की और उसके पाकिस्तानी नेटवर्क से संभावित जुड़ाव की जांच कर रहे हैं. शुरुआती जांच के अनुसार हमलावरोंको रसद या वैचारिक समर्थन पाकिस्तान से मिलने की बात कही जा रही है.पाकिस्तान स्थित सुन्नी आतंकी संगठन जैश-उल-अदल ने कई बार ईरानीसुरक्षाबलों पर हमला किया है. 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ड्रोन और मिसाइल हमले किए. उसका निशानाजैश-उल-अदल के ठिकाने थे। ईरान अकसर पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह इन सुन्नी आतंकियों को शरण देता है और उनके खिलाफकार्रवाई नहीं करता.