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सरिता साहनी
नई दिल्ली, 20 मार्च

दिल्ली के पालम इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड को लेकर अब राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की दुखद घटना पर भी राजनीति की जा रही है। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि एक परिवार पर आई इस बड़ी आपदा के समय संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत थी, लेकिन सौरभ भारद्वाज ने इसे एक राजनीतिक मंच बना दिया।

नाटकीय अंदाज पर उठाए सवाल
वीरेन्द्र सचदेवा ने सौरभ भारद्वाज के उस प्रदर्शन की आलोचना की जिसमें उन्होंने सिर पर कफन बांधकर और अर्थी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सचदेवा के अनुसार, यह व्यवहार बेहद नाटकीय था और इससे यह साफ होता है कि उनका उद्देश्य पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताना नहीं, बल्कि खबरों में बने रहना था। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में नेताओं को संयम और गंभीरता दिखानी चाहिए, न कि इस तरह के प्रदर्शन करने चाहिए।

आग के कारणों पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में वीरेन्द्र सचदेवा ने आग लगने के कारणों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पालम इलाके में यह चर्चा है कि जिस इमारत में आग लगी, उसके भूतल में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ रखे हुए थे। उन्होंने सौरभ भारद्वाज से पूछा कि क्या वह इस बात को स्वीकार करते हैं या नहीं। उनका कहना है कि अगर यह सच है, तो यह हादसे का एक बड़ा कारण हो सकता है और इस पहलू की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

सरकार ने दिए जांच के आदेश
वीरेन्द्र सचदेवा ने जानकारी दी कि दिल्ली सरकार ने इस अग्निकांड की मैजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आग कैसे लगी, क्या राहत कार्य में कोई कमी रही, और क्या फायर ब्रिगेड ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई या नहीं। सचदेवा ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल दोष तय करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय ढूंढना भी होना चाहिए।

फायर ब्रिगेड और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि फायर ब्रिगेड की सुविधाओं और संसाधनों की कमी पर सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ यह भी देखना होगा कि क्या इमारत के अंदर रखे ज्वलनशील पदार्थों ने आग को और अधिक खतरनाक बना दिया। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी एजेंसियों को दोष देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हादसे के हर पहलू को समझना जरूरी है।

विवेक विहार हादसे का जिक्र कर उठाए सवाल
वीरेन्द्र सचदेवा ने साल 2024 में हुए विवेक विहार के एक बड़े हादसे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय एक अवैध अस्पताल में आग लगने से 7 मासूम बच्चों की जान चली गई थी। उस समय सौरभ भारद्वाज स्वास्थ्य मंत्री थे, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। सचदेवा ने सवाल उठाया कि आखिर उस समय चुप्पी क्यों साधी गई थी।

दोहरी राजनीति का आरोप
वीरेन्द्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि सौरभ भारद्वाज दोहरी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह विवेक विहार हादसे में गैस सिलेंडरों के मुद्दे पर चुप्पी रही, उसी तरह अब पालम हादसे में भी ज्वलनशील पदार्थों के मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि अलग-अलग घटनाओं में अलग-अलग रवैया अपनाना सही नहीं है।

संवेदनशीलता बनाम राजनीति की जरूरत
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुखद घटनाओं पर राजनीति होनी चाहिए या फिर सभी को मिलकर पीड़ितों की मदद और सच्चाई सामने लाने पर ध्यान देना चाहिए। आम लोगों की उम्मीद है कि इस मामले में जल्द से जल्द सच्चाई सामने आए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। पालम अग्निकांड ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया है। ऐसे समय में राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा जरूरी है कि जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस हादसे के पीछे असली कारण क्या थे और आगे ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।

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