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दक्षिण अफ्रीका में होने जा रहे जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले भारत सरकार ने इस दौरे को वैश्विक आर्थिक और सामरिक मुद्दों पर गहराई सेचर्चा का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। विदेश मंत्रालय के सचिव (ईआर) सुधाकर दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 23 नवंबर तकजोहांसबर्ग की यात्रा करेंगे, जहां वे जी20 नेताओं की बैठक में भाग लेंगे। सुधाकर दलेला ने बताया कि यह जी20 सम्मेलन पहली बार अफ्रीकी धरतीपर आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के निमंत्रण पर होने वाला यह कार्यक्रम भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 मेंसफल अध्यक्षता के बाद भारत अपनी प्राथमिकताओं की निरंतरता इस मंच पर रख सकेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी का दक्षिण अफ्रीका का चौथाआधिकारिक दौरा होगा। इससे पहले वे 2016 में द्विपक्षीय दौरे पर और 2018 व 2023 में ब्रिक्स सम्मेलनों के लिए गए थे।

पर्यावरणीय असुरक्षाओं को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी
दलेला ने कहा कि जी20 अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच बन चुका है। यह समूह दुनियाकी 85 प्रतिशत जीडीपी और लगभग तीन-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने बताया कि इस मंच पर ऐसे विषयों पर विशेष फोकसकिया जाएगा जिनका सीधा असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ता है। इसमें सतत विकास लक्ष्यों पर प्रगति, वैश्विक प्रशासनिक संस्थाओं में सुधार, पर्यावरणऔर जलवायु चुनौतियों का समाधान तथा डिजिटल खाई को पाटने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
सचिव दलेला ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने अपने जी20 एजेंडा के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें आपदा प्रबंधन क्षमता कोमजबूत करना, कम आय वाले देशों के कर्ज संकट को दूर करना, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्त जुटाना और समावेशी वृद्धि के लिए महत्वपूर्णखनिजों का उपयोग बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकताएं वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय असुरक्षाओं को कम करने में निर्णायकभूमिका निभाएंगी।

मजबूत करने का अवसर माना जा रहा
दलेला के मुताबिक भारत इस सम्मेलन में अपनी अध्यक्षता के दौरान उठाए गए मुद्दों को आगे बढ़ाएगा। भारत विशेष रूप से विकासशील देशों कीआवाज को मजबूत करने, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा मॉडल को साझा करने, जलवायु न्याय की अवधारणा को मजबूती देने और वैश्विक संस्थाओं मेंसमावेशी सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाएगा। भारत का मानना है कि टिकाऊ विकास और आर्थिक संतुलन तभी संभव है, जब वैश्विक मंचों परसमान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देश ब्रिक्स, जी20 और ग्लोबल साउथ जैसे मंचों पर समान सोच साझा करते हैं। सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय मुलाकातों, बहुपक्षीय चर्चाओं और वैश्विकघोषणाओं के जरिए भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता को और बढ़ाएगा। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय सहयोग, स्थिरता और समावेशी विकास के भारत केदृष्टिकोण को मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है।

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