
बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन में सपा ने भले ही सबसे पहले मैदान में उतरकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी हो लेकिन हालात यह संकेत दे रहेहैं कि इस बार भी सपा के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। सपा ने बिजनौर के रहने वाले हाजी दानिश अख्तर को प्रत्याशी घोषित किया है जबकिभाजपा की ओर से अभी आधिकारिक नाम नहीं आया लेकिन संभावना यही हैं कि मौजूदा एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों एक बार फिर मैदान में उतरसकते हैं। 2020 में हुए शिक्षक निर्वाचन में भाजपा समर्थित डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने सपा प्रत्याशी संजय मिश्रा को बड़े अंतर से हराया था। कुल 36 हजार मतदाताओं में से ढिल्लों को 12,827 वोट प्राप्त हुए थे जबकि सपा को 4,864 मत पर संतोष करना पड़ा था।
दोबारा टिकट मिल सकता
दिलचस्प बात यह है कि इस बार सपा ने जिस हाजी दानिश को टिकट दिया है उन्होंने पिछला चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था औरमहज 723 वोट ही प्राप्त कर सके थे। ऐसे में हाजी दानिश सपा के पीडीए फार्मूले के दम पर कितना सफल हो पाएंगे यह एक बड़ा सवाल है।भाजपा ने अभी औपचारिक घोषणा नहीं की है लेकिन संगठन के भीतर यह माना जा रहा है कि मौजूदा एमएलसी डॉ. ढिल्लो को ही दोबारा टिकटमिल सकता है। वह शिक्षक वर्ग में लंबे समय से सक्रिय भी हैं और बरेली-मुरादाबाद सीट पर सिख और जाट सिख समुदाय में काफी अच्छी पकड़ भीरखते हैं।
भाजपा के साथ गठबंधन
इसके अलावा वह वित्तविहीन शिक्षकों के भी बड़े नेता माने जाते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी के समधी होने के नाते उनका पलड़ा औरभी मजबूत नजर आता है। पूर्व में राष्ट्रीय लोकदल ने उन्हें एमएलसी बनाया था। इस बार रालोद भी भाजपा के साथ गठबंधन में है। ऐसे में माना जारहा है कि डॉ. ढिल्लो को रालोद का भी खुला समर्थन मिल सकता है। इससे भाजपा खेमे को लाभ मिल सकता है। सपा ने एक साल पहले हीप्रत्याशी का नाम घोषित कर राजनीतिक माहौल जरूर तैयार किया है लेकिन चुनाव नवंबर-2026 में होने हैं और डॉ. ढिल्लो का कार्यकाल दिसंबर-2026 तक है।