
नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026।
बीसीआई चेयरमैन से इस्तीफे की मांग
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन और भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ सवाल खड़े किए हैं। केजरीवाल ने बीसीआई द्वारा नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के विद्यार्थियों के नामांकन को रोकने से जुड़े आदेश को गलत बताते हुए मनन कुमार मिश्रा से इस्तीफे की मांग की है। केजरीवाल का कहना है कि बीसीआई वकीलों की एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। उनके अनुसार, ऐसी संस्था को किसी राजनीतिक दल के प्रभाव में काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नालसार यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के नामांकन को रोकने का आदेश उचित नहीं था और देशभर में विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा।
बीसीआई को राजनीतिक संस्था नहीं बनाना चाहिए
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया वकीलों की स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, भाजपा का प्रकोष्ठ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बहुत जरूरी है और किसी भी संस्था को राजनीतिक दबाव या राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था द्वारा कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो उसके पीछे स्पष्ट और उचित कारण होना चाहिए। विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
जनता के दबाव के बाद आदेश वापस लेने का दावा
केजरीवाल ने दावा किया कि देश के नागरिकों और अलग-अलग स्तर पर हुए विरोध के बाद बीसीआई चेयरमैन को अपना आदेश वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि जब आम लोग किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं तो सरकारों और संस्थाओं को भी उनकी बात सुननी पड़ती है। उन्होंने कहा कि देश की जागरूक जनता अब किसी भी तरह का सत्ता का अहंकार स्वीकार नहीं करेगी। जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने की मांग करती रहेगी।
संस्थाओं की स्वतंत्रता पर केजरीवाल ने उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार पर असहमति को दबाने और संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई संस्थाओं पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग संस्थाओं का स्वतंत्र रूप से काम करना जरूरी है। यदि संस्थाएं राजनीतिक दबाव में काम करेंगी तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि जनता अब जागरूक है और वह यह तय करेगी कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए न हो।
बच्चों की शिक्षा के मुद्दे पर भी बोले केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को देश के अलग-अलग हिस्सों में अच्छी शिक्षा की मांग को लेकर आवाज उठा रहे बच्चों का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के माध्यम से कहा कि देश के बच्चे अब अपनी शिक्षा और स्कूलों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चे सड़कों पर उतरकर यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाए। केजरीवाल ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अगर बच्चों को बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक और स्कूल तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क जैसी मूल सुविधाओं के लिए आवाज उठानी पड़ रही है तो इस पर सरकारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हमीरपुर के बच्चों का उदाहरण दिया
केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की एक घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार, वहां बच्चों ने स्कूल जाने वाली खराब सड़क की समस्या को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया। केजरीवाल ने बच्चों की आवाज उठाने के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों ने अपनी समस्या को सामने रखकर यह दिखाया है कि वे अपने अधिकारों और अपने भविष्य को लेकर जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी आवाज सुनी गई और अधिकारी समस्या को देखने के लिए मौके पर पहुंचे।
लखनऊ में शिक्षकों की कमी का मुद्दा
अरविंद केजरीवाल ने लखनऊ के एक सरकारी स्कूल से जुड़ी घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वहां सरकारी स्कूल के बच्चों ने शिक्षकों की कमी को लेकर विरोध किया। केजरीवाल ने कहा कि बच्चों को स्कूल में पर्याप्त शिक्षक मिलना उनका जरूरी अधिकार है। यदि स्कूलों में शिक्षक ही पर्याप्त संख्या में नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी अच्छी शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित स्कूल और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
“जेन अल्फा अब नहीं रुकेगा”
अरविंद केजरीवाल ने अपने संदेश में जेन अल्फा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के बच्चे अपनी समस्याओं को लेकर पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं। उनका कहना है कि बच्चे अब अपनी शिक्षा और स्कूलों की समस्याओं को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब बच्चों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, देश के स्कूलों की स्थिति सुधारना जरूरी है और पुरानी व्यवस्था में बदलाव लाने की जरूरत है।
अच्छी शिक्षा को बताया सबसे जरूरी मुद्दा
केजरीवाल ने कहा कि देश के बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए अच्छी शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही अवसर मिलने चाहिए जो किसी भी अन्य बच्चे को मिलते हैं। उन्होंने स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, अच्छी इमारतें, साफ-सफाई, सुरक्षित रास्ते और पढ़ाई का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उनका कहना है कि यदि देश को आगे बढ़ाना है तो बच्चों की शिक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा।
जनता और बच्चों की आवाज को सुनने की अपील
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि चाहे मामला किसी लोकतांत्रिक संस्था की स्वतंत्रता का हो या बच्चों की शिक्षा का, लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो रही है और बच्चों में भी अपने भविष्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।